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14 Oct 2016 · 1 min read

मुक्तक ३ और ४ कहीं कोई भटकाव नहीं ( पोस्ट १७)

कहीं कोई भटकाव नहीं
कहीं कोई अलगाव नहीं
किसी पंथ के अनुयायी हों
आपस में टकराव नहीं ।।३।।

आस का, अभिलाष का , विश्वास का हो ।
पल्लवित वट वृक्ष नव उल्लास का हो ।
बैठ जिसकी छॉव में जीवन सँवारें !
हम सभी को प्रत्येक पल मधुमास का हो।।४!!

—- जितेन्द्रकमल आनंद

Language: Hindi
185 Views
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