Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Dec 2017 · 1 min read

मुक्तक-२

मुक्तक
******
मुक्तक हो या छंद हो, पढ़ कर लें आनंद।
रचनाएं ऐसी करें, जिनमें रसधार अमंद ।
जांचे मात्रा भार को, तुला तौल की भाँति-
खिलती रचना है तभी,बनकर सुरभित छंद।
प्रो० राहुल प्रताप सिंह

Language: Hindi
451 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
World Blood Donar's Day
World Blood Donar's Day
Tushar Jagawat
नमी आंखे....
नमी आंखे....
Naushaba Suriya
चंद्रयान 3
चंद्रयान 3
Dr Archana Gupta
🌹हार कर भी जीत 🌹
🌹हार कर भी जीत 🌹
Dr Shweta sood
किसी अनमोल वस्तु का कोई तो मोल समझेगा
किसी अनमोल वस्तु का कोई तो मोल समझेगा
कवि दीपक बवेजा
शुभ रात्रि मित्रों
शुभ रात्रि मित्रों
आर.एस. 'प्रीतम'
जिंदगी
जिंदगी
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
मर्दों वाला काम
मर्दों वाला काम
Dr. Pradeep Kumar Sharma
एक दोहा...
एक दोहा...
डॉ.सीमा अग्रवाल
मेरा दुश्मन
मेरा दुश्मन
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
लिखा नहीं था नसीब में, अपना मिलन
लिखा नहीं था नसीब में, अपना मिलन
gurudeenverma198
आस्था होने लगी अंधी है
आस्था होने लगी अंधी है
पूर्वार्थ
अच्छाई बाहर नहीं अन्दर ढूंढो, सुन्दरता कपड़ों में नहीं व्यवह
अच्छाई बाहर नहीं अन्दर ढूंढो, सुन्दरता कपड़ों में नहीं व्यवह
Lokesh Sharma
3328.⚘ *पूर्णिका* ⚘
3328.⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
जिंदगी बिलकुल चिड़िया घर जैसी हो गई है।
जिंदगी बिलकुल चिड़िया घर जैसी हो गई है।
शेखर सिंह
#शेर
#शेर
*प्रणय प्रभात*
झरोखों से झांकती ज़िंदगी
झरोखों से झांकती ज़िंदगी
Rachana
काम क्रोध मद लोभ के,
काम क्रोध मद लोभ के,
sushil sarna
उसकी दोस्ती में
उसकी दोस्ती में
Satish Srijan
अगर ख़ुदा बनते पत्थर को तराश के
अगर ख़ुदा बनते पत्थर को तराश के
Meenakshi Masoom
धृतराष्ट्र की आत्मा
धृतराष्ट्र की आत्मा
ओनिका सेतिया 'अनु '
घर बन रहा है
घर बन रहा है
रोहताश वर्मा 'मुसाफिर'
क्यो नकाब लगाती
क्यो नकाब लगाती
भरत कुमार सोलंकी
एक सशक्त लघुकथाकार : लोककवि रामचरन गुप्त
एक सशक्त लघुकथाकार : लोककवि रामचरन गुप्त
कवि रमेशराज
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Shweta Soni
हम किसी सरकार में नहीं हैं।
हम किसी सरकार में नहीं हैं।
Ranjeet kumar patre
चाहत
चाहत
Sûrëkhâ
कुछ मत कहो
कुछ मत कहो
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
किसी ने आंखें बंद की,
किसी ने आंखें बंद की,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
*** मेरे सायकल की सवार....! ***
*** मेरे सायकल की सवार....! ***
VEDANTA PATEL
Loading...