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Oct 14, 2016 · 1 min read

मुक्तक::: हर सुबह एक नयी आस लिए होती है

हर सुबह एक नयी आस लिए होती है ।
दोपहर एक अमिट प्यास लिए होती है ।
डूब जाता हूँ किसी याद की तन्हाई में ,
चॉदनी रात जब मधुहास लिए होती है ।।१!!पोस्ट १५!!

—- जितेन्द्र कमल आनंद

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