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20 Jul 2016 · 1 min read

“मीत मेरे” गीतिका

प्रीति मेरी मीत तेरे नाम है
सुबह तुम से ही तुम्हीं से शाम है
>> •~~~•~~•~•
मैं विरहिनी गीत दुख के गा रही
याद में जलना यही इक काम है
>> •~~•~~•
नित नए उपनाम मुझको मिल रहे
ये कहानी जानता सब ग्राम है
>> •~~•~~•~•
कह रहे थे देखकर हमको सभी
एक राधा दूसरा घनश्याम है।
>> •~~•~~•
साथ पाया जो तुम्हारा जी उठी
बिन तुम्हारे जिंदगी विराम है
>> •~•~~•~•
प्रीति तेरी सौ जनम तक चाहिए
मिलन तुमसे पुण्य का परिणाम है
>> •~~•~~•~~•
तुम चले आओ खिले मन वाटिका
बाट तेरी तक रही हर याम है।।।।
>> •~•~~•~~•
‘अंकिता’ तकती तुम्हें है एकटक
शांत छवि अनुपम बङी अभिराम है।।

6 Comments · 270 Views
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