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26 Feb 2024 · 1 min read

मारी थी कभी कुल्हाड़ी अपने ही पांव पर ,

मारी थी कभी कुल्हाड़ी अपने ही पांव पर ,
जिसका जख्म अब नासूर बन गया।
अश्क ही अश्क रह गए अब जिंदगी में,
खुशियों और सुकून का दौर काफूर हो गया ।

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