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24 Jun 2023 · 1 min read

*मारा हमने मूक कब, पशु जो होता मौन (कुंडलिया)*

मारा हमने मूक कब, पशु जो होता मौन (कुंडलिया)

मारा हमने मूक कब, पशु जो होता मौन
कॉंटे-छुरियों से कहॉं, खाया हमने कौन
खाया हमने कौन, अग्रकुल की परिपाटी
अग्रोहा की देन, रक्त से सनी न माटी
कहते रवि कविराय, नियम यह रहा हमारा
पशु को नहीं कदापि, स्वाद-हित हम ने मारा

रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

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