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11 Mar 2024 · 1 min read

मानव के बस में नहीं, पतझड़ या मधुमास ।

मानव के बस में नहीं, पतझड़ या मधुमास ।
तृप्ति तीर पर सर्वदा, उसको मिलती प्यास ।
मरीचिका सी जिन्दगी, आभासी अनुबंध –
सुख पाने के अन्त में, होते व्यर्थ प्रयास ।

सुशील सरना / 11-3-24

1 Like · 69 Views
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