Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
31 Dec 2022 · 1 min read

*माता-पिता (दोहा मुक्तक)*

माता-पिता (दोहा मुक्तक)
_________________________
जननी कोई कह रहा, होती श्रेष्ठ महान
जनक किसी को लग रहा, है भगवान-समान
ऋणी सदा से है मनुज, करता पुण्य प्रणाम
पिता और माता सभी, होते दयानिधान
_________________________
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

Language: Hindi
1 Like · 234 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
मैं जीना सकूंगा कभी उनके बिन
मैं जीना सकूंगा कभी उनके बिन
कृष्णकांत गुर्जर
* रेत समंदर के...! *
* रेत समंदर के...! *
VEDANTA PATEL
* पावन धरा *
* पावन धरा *
surenderpal vaidya
2865.*पूर्णिका*
2865.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*ये रिश्ते ,रिश्ते न रहे इम्तहान हो गए हैं*
*ये रिश्ते ,रिश्ते न रहे इम्तहान हो गए हैं*
Shashi kala vyas
क्या करते हो?
क्या करते हो?
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
डार्क वेब और इसके संभावित खतरे
डार्क वेब और इसके संभावित खतरे
Shyam Sundar Subramanian
अक़्सर बूढ़े शज़र को परिंदे छोड़ जाते है
अक़्सर बूढ़े शज़र को परिंदे छोड़ जाते है
'अशांत' शेखर
*राम भक्ति नवधा बतलाते (कुछ चौपाइयॉं)*
*राम भक्ति नवधा बतलाते (कुछ चौपाइयॉं)*
Ravi Prakash
नियोजित शिक्षक का भविष्य
नियोजित शिक्षक का भविष्य
साहिल
पतंग
पतंग
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
बचपन
बचपन
लक्ष्मी सिंह
इस महफ़िल में तमाम चेहरे हैं,
इस महफ़िल में तमाम चेहरे हैं,
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
जाने वाले बस कदमों के निशाँ छोड़ जाते हैं
जाने वाले बस कदमों के निशाँ छोड़ जाते हैं
VINOD CHAUHAN
मां होती है
मां होती है
Seema gupta,Alwar
गुरू शिष्य का संबन्ध
गुरू शिष्य का संबन्ध
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
दर्द देकर मौहब्बत में मुस्कुराता है कोई।
दर्द देकर मौहब्बत में मुस्कुराता है कोई।
Phool gufran
नया विज्ञापन
नया विज्ञापन
Otteri Selvakumar
चुनाव चालीसा
चुनाव चालीसा
विजय कुमार अग्रवाल
रक़्श करतें हैं ख़यालात मेरे जब भी कभी..
रक़्श करतें हैं ख़यालात मेरे जब भी कभी..
Mahendra Narayan
दोहे- शक्ति
दोहे- शक्ति
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
एक तू ही नहीं बढ़ रहा , मंजिल की तरफ
एक तू ही नहीं बढ़ रहा , मंजिल की तरफ
कवि दीपक बवेजा
लिखने – पढ़ने का उद्देश्य/ musafir baitha
लिखने – पढ़ने का उद्देश्य/ musafir baitha
Dr MusafiR BaithA
💐प्रेम कौतुक-502💐
💐प्रेम कौतुक-502💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
बर्दाश्त की हद
बर्दाश्त की हद
Shekhar Chandra Mitra
इश्क़ में रहम अब मुमकिन नहीं
इश्क़ में रहम अब मुमकिन नहीं
Anjani Kumar
महानगर की जिंदगी और प्राकृतिक परिवेश
महानगर की जिंदगी और प्राकृतिक परिवेश
कार्तिक नितिन शर्मा
शेखर सिंह ✍️
शेखर सिंह ✍️
शेखर सिंह
👌ग़ज़ल :--
👌ग़ज़ल :--
*Author प्रणय प्रभात*
#Dr Arun Kumar shastri
#Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
Loading...