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20 Mar 2024 · 1 min read

माणुष

💐💐💐कुण्डलिया निवेदन💐💐💐

माणष मोती चावतो , ढूँढ़ै नित नित सींप ।
सींपी जीवण पाळती ,माणुष पाळै खींप ।।
माणुष पाळै खींप , सींप को जीव बिसारै
पेट जीव को फाड़ ,आपणो स्वार्थ सिधावै
कह भूधर कविराय,माणष बण्यो कुमाणष
पग पग करतो पाप, चावतो मोती माणष ।।

भवानी सिंह ‘भूधर’
बड़नगर, जयपुर

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