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6 Mar 2023 · 1 min read

माँ के सपने

गुमसुम सी रहती है माँ
पिता के जाने के बाद

सुरज उगने से पहले नहाकर

ओढ़ लेती है हल्के रंग की ओढ़नी
और
सजा लेती है गम्भीरता की बिंदी

अपने सूने माथे पर

सीलती रहती है दिनभर

औरों के लिए रंगीन कपड़े

आँगन में अकेले बैठकर

कभी-कभार मुस्कुरा देती है

मेरी ओर देखकर

एक अनचाही मुस्कान के साथ

कहीं पहचान न जाए

मेरा छोटा दिल उसके बड़े गम ।

माँ… मैं हो गया अब बड़ा

समय से पहले

माँ… मैं बुनुंगा तेरे वो अधुरे सपने

निभाऊँगा ना मैं बेटा होने का फर्ज

नहीं आने दूंगा तेरी आँखों में आँसू

मैं लाऊँगा वो खुशियाँ तेरे चेहरे पर

मैं सजाऊँगा तेरे आंचल में रंगीन तारे

माँ तू मेरे सर पर बस अपना हाथ रख दे।

©®राजदीप सिंह इन्दा

Language: Hindi
133 Views
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