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6 Mar 2023 · 1 min read

मां रा सपना

गुमसुम सी रैवै है मां
बापू रै जायां पछै !

सूरज उगण सूं पैलां’इज नहा’र
ओढ़ लेवै है
हळ्कै रंग री ओढ़णी
अर
लगा लेवै आपरै
सूनै माथै पर
गंभीरता री बिंदी ।

सींवती रेवै है मां..आखै दिन
औरां खातर रंगील कपड़ा
आंगण मांय अेकली बैठ’र ।

कदी कदास ही मुळकै है मां
म्हारै साम्ही देख’र
अेक अणचांवती सी मुळक रै साथै
कै..कदास पिछाण ना लेवै
म्हारो छोटो काळजो..
उणां रा वै गैरा… दुख।

मां… म्हूं हूग्यो हुं अब मोटो
बखत सूं पैलां ही’इज
म्हैं गूंथुला थारा वै अधुरा रैयोडा़ सपना
निभाऊंलो म्हैं बेटो होवणै रो फरज
नीं आवण देवूं अब थारी आँख्यां मांय आँसू ।

मां म्हैं ल्याउं लो सगळी खुशियां
थारै इण चेहरै माथै
म्हैं सजाऊंलो…थारै
आंचळ मांय रंगील तारा ।

मां…थूं म्हारै सिर ऊपर
बस थारो हाथ राखजै।

1 Like · 1 Comment · 602 Views
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