Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 Sep 2016 · 2 min read

माँँ ने कभी न हिम्‍मत हारी

माँ ने कभी न हिम्मत हारी।

बस कुछ न कुछ करते धरते
कदमों को न देखा थकते
पौ फटने से साँझ ढले तक
बस देखा है उम्र बदलते
हर दम देखी काम खुमारी।
माँ ने कभी न……..

झाड़ू चौका चूल्हा चक्की
समय साधने में वह पक्की
नहीं पड़ी कोई क्या कहता
सोच लिया तो करना नक्की
पीछे रहती घड़ी बिचारी।
माँ ने कभी न……..

कपड़े धोना, सीना-पोना
दूध जमाना, छाछ बिलोना
साफ-सफाई की बीमारी
धोना घर का कोना-कोना
समय पूर्व करती तैयारी।
माँ ने कभी न……..

सही समय पर हमें उठाना
नहीं उठें तो आँख दिखाना
घुटी पिलाना संस्कारों की
पर्व त्योहारों को समझाना
घर भर है उसका बलिहारी।
माँँ ने कभी न………

पास-पड़ौस समाज सभी का
ध्यान रहे हर काम सभी का
हर खुशियों गम में शरीक हो
हाथ बँटाती सदा सभी का
बस ऐसे ही उम्र गुजारी।
माँ ने कभी न……..

बहिना की जब हुई सगाई
खुशियों से फूली न समाई
दौड़-दौड़ दुगुनी हिम्मत से
पल में उसकी करी बिदाई
फिर टूटी पर उफ न पुकारी।
माँ ने कभी न……..

पापा के कंधे से मिल कर
हाथ बँटाया हँस मिलजुल कर
कभी पता ना चला समय का
बड़े हो गये हम कब पल कर
समझ गये माँ की खुददारी।
माँ ने कभी न……..

आई बहू न कुछ भी बदला
कहती धी ने चोला बदला
मेरे घर हैं कौन कुटुम्बी
ईन-मीन चारों का खटला
कहती घर गूँजे किलकारी
माँ ने कभी न……..

सौभाग्य कहा और मिली बधाई
कहते सब हैं लक्ष्मी आई
मैंने सुख पाया माँ है खुश
मुझको तो माँ जैसी पाई
अब सुख पाएगी महतारी।
माँ ने कभी न……..

माँँ ने कभी न हिम्‍मत हारी।।

Language: Hindi
Tag: गीत
224 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
View all
You may also like:
कल चाँद की आँखों से तन्हा अश्क़ निकल रहा था
कल चाँद की आँखों से तन्हा अश्क़ निकल रहा था
'अशांत' शेखर
नया है रंग, है नव वर्ष, जीना चाहता हूं।
नया है रंग, है नव वर्ष, जीना चाहता हूं।
सत्य कुमार प्रेमी
शर्म शर्म आती है मुझे ,
शर्म शर्म आती है मुझे ,
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी की १३२ वीं जयंती
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी की १३२ वीं जयंती
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
-- कटते पेड़ --
-- कटते पेड़ --
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
कोई तो रोशनी का संदेशा दे,
कोई तो रोशनी का संदेशा दे,
manjula chauhan
मुसलसल ठोकरो से मेरा रास्ता नहीं बदला
मुसलसल ठोकरो से मेरा रास्ता नहीं बदला
कवि दीपक बवेजा
क्या चाहती हूं मैं जिंदगी से
क्या चाहती हूं मैं जिंदगी से
Harminder Kaur
पहचान
पहचान
Dr.S.P. Gautam
Gulab ke hasin khab bunne wali
Gulab ke hasin khab bunne wali
Sakshi Tripathi
बाबा साहब की अंतरात्मा
बाबा साहब की अंतरात्मा
जय लगन कुमार हैप्पी
तेरा फिक्र
तेरा फिक्र
Basant Bhagawan Roy
अक्षत और चूहों की बस्ती
अक्षत और चूहों की बस्ती
Dr. Reetesh Kumar Khare डॉ रीतेश कुमार खरे
जब होंगे हम जुदा तो
जब होंगे हम जुदा तो
gurudeenverma198
पता ही नहीं चला
पता ही नहीं चला
Surinder blackpen
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
आंख में बेबस आंसू
आंख में बेबस आंसू
Dr. Rajeev Jain
जिनके होंठों पर हमेशा मुस्कान रहे।
जिनके होंठों पर हमेशा मुस्कान रहे।
Phool gufran
दो शे'र
दो शे'र
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
होके रहेगा इंक़लाब
होके रहेगा इंक़लाब
Shekhar Chandra Mitra
#प्रेरक_प्रसंग-
#प्रेरक_प्रसंग-
*Author प्रणय प्रभात*
💐प्रेम कौतुक-247💐
💐प्रेम कौतुक-247💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
स्त्री चेतन
स्त्री चेतन
Astuti Kumari
कुछ
कुछ
DR. Kaushal Kishor Shrivastava
*जी रहें हैँ जिंदगी किस्तों में*
*जी रहें हैँ जिंदगी किस्तों में*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
2832. *पूर्णिका*
2832. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
💐दुधई💐
💐दुधई💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
*फाइल सबको भरना है (गीतिका)*
*फाइल सबको भरना है (गीतिका)*
Ravi Prakash
तुम तो मुठ्ठी भर हो, तुम्हारा क्या, हम 140 करोड़ भारतीयों का भाग्य उलझ जाएगा
तुम तो मुठ्ठी भर हो, तुम्हारा क्या, हम 140 करोड़ भारतीयों का भाग्य उलझ जाएगा
Anand Kumar
Loading...