Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Feb 2023 · 1 min read

*मस्तियों का आ गया मौसम, हवा में प्यार है (हिंदी गजल/गीतिका

मस्तियों का आ गया मौसम, हवा में प्यार है (हिंदी गजल/गीतिका)
■■■■■■■■■■■■
(1)
मस्तियों का आ गया मौसम ,हवा में प्यार है
सात रंगों से समूचा , खिल रहा संसार है
(2)
रात पूनम की हुई जब बेशरम ,कहने लगी
फागुनी है गंध , हृदयों का प्रकट उद्गार है
(3)
बूढ़े जवानों की तरह ,आचरण करने लगे
त्रुटि नहीं इनकी ,सरस ऋतु का मधुर उपहार है
(4)
आ गया रति को लुभाने ,कामदेव प्रसन्न हो
सौ-सौ रचयिता देवगण ,आपका आभार है
(5)
छह बनाईं ऋतु धरा पर ,सृष्टिकर्ता ने भले
पर अलौकिक चैत-फागुन का मधुर श्रंगार है
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
रचयिता: रवि प्रकाश बाजार सर्राफा,
रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997 61 54 51

162 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
उजले दिन के बाद काली रात आती है
उजले दिन के बाद काली रात आती है
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
बुद्ध फिर मुस्कुराए / MUSAFIR BAITHA
बुद्ध फिर मुस्कुराए / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
यादों के गुलाब
यादों के गुलाब
Neeraj Agarwal
*आज छपा जो समाचार वह, कल बासी हो जाता है (हिंदी गजल)*
*आज छपा जो समाचार वह, कल बासी हो जाता है (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
भाई बहन का प्रेम
भाई बहन का प्रेम
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
उदास आँखों से जिस का रस्ता मैं एक मुद्दत से तक रहा था
उदास आँखों से जिस का रस्ता मैं एक मुद्दत से तक रहा था
Aadarsh Dubey
--पागल खाना ?--
--पागल खाना ?--
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
समाज के बदलते स्वरूप में आप निवेशक, उत्पादक, वितरक, विक्रेता
समाज के बदलते स्वरूप में आप निवेशक, उत्पादक, वितरक, विक्रेता
Sanjay ' शून्य'
दिल पागल, आँखें दीवानी
दिल पागल, आँखें दीवानी
Pratibha Pandey
मैं तुम और हम
मैं तुम और हम
Ashwani Kumar Jaiswal
पिता
पिता
Dr Manju Saini
फेसबुक पर सक्रिय रहितो अनजान हम बनल रहैत छी ! आहाँ बधाई शुभक
फेसबुक पर सक्रिय रहितो अनजान हम बनल रहैत छी ! आहाँ बधाई शुभक
DrLakshman Jha Parimal
22, *इन्सान बदल रहा*
22, *इन्सान बदल रहा*
Dr Shweta sood
कभी लगे के काबिल हुँ मैं किसी मुकाम के लिये
कभी लगे के काबिल हुँ मैं किसी मुकाम के लिये
Sonu sugandh
■ क़तआ (मुक्तक)
■ क़तआ (मुक्तक)
*Author प्रणय प्रभात*
*
*"परछाई"*
Shashi kala vyas
बेटीयां
बेटीयां
Aman Kumar Holy
मैं
मैं
Vivek saswat Shukla
व्यंग्य क्षणिकाएं
व्यंग्य क्षणिकाएं
Suryakant Dwivedi
🙏🙏श्री गणेश वंदना🙏🙏
🙏🙏श्री गणेश वंदना🙏🙏
umesh mehra
शब्दों की अहमियत को कम मत आंकिये साहिब....
शब्दों की अहमियत को कम मत आंकिये साहिब....
Dr. Akhilesh Baghel "Akhil"
तुम्हारा घर से चला जाना
तुम्हारा घर से चला जाना
Dheerja Sharma
छुप जाता है चाँद, जैसे बादलों की ओट में l
छुप जाता है चाँद, जैसे बादलों की ओट में l
सेजल गोस्वामी
ये सुबह खुशियों की पलक झपकते खो जाती हैं,
ये सुबह खुशियों की पलक झपकते खो जाती हैं,
Manisha Manjari
2777. *पूर्णिका*
2777. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
वृक्षों का रोपण करें, रहे धरा संपन्न।
वृक्षों का रोपण करें, रहे धरा संपन्न।
डॉ.सीमा अग्रवाल
दहेज की जरूरत नहीं
दहेज की जरूरत नहीं
भरत कुमार सोलंकी
ऐसे ना मुझे  छोड़ना
ऐसे ना मुझे छोड़ना
Umender kumar
नींबू की चाह
नींबू की चाह
Ram Krishan Rastogi
ये मेरा हिंदुस्तान
ये मेरा हिंदुस्तान
Mamta Rani
Loading...