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7 Sep 2016 · 1 min read

उड़ चल रे मन
कर ले अपने सपनों को पूरा
देखे थे जो तूने कभी
मत देख आसमाँ को
बन्द कमरे की खिड़की से
चल,बाहर निकल
और देख खुले आसमाँ को
जिसका कोई ओर न छोर ।
तोड़ दे उन सीमाओं की जंजीरों को
जकड़ा है जिन्होंने सदियों से तुझे
चल निकल , कर ले कम से कम
एक स्वप्न तो पूरा
कर ले हौसला बुलंद
तभी तो सार्थक होगा
ये जीवन तेरा ।

Language: Hindi
Tag: कविता
202 Views
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