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27 Jul 2016 · 1 min read

मन से अंतर मन का प्रयाण ….

मन से अंतर मन का प्रयाण…..
—————————————-
मन से
अंतर मन का प्रयाण है
नर की
ह्रदयहीनता का प्रमाण है
मानवता कर रही क्रंदन
मनुज बना हैवान है
पर पीर
स्व आनंद का गान है
स्त्री का
कहाँ अब सम्मान है
रौंद-रौंद कर
समझते अपना मान हैं
तार – तार
ममता करुणा की खान है
घर – घर नहीं
स्वार्थ का मकान है
चाँद को पाने में
धरती को खोने का न ज्ञान है
रोटी को पाने में
बेटी को खोने का न भान है
पैसे! पैसे! पैसे
की अंधी दौड़ का उफान है
खो चुकी समरसता
इंसानियत अब बे – जान है
लगती अब
प्रेम – ईमान की दुकान है
उपेक्षा ,शठता
दुर्बलता – हठ ही पहचान है
मन से
अंतर मन का प्रयाण है …….
……..डॉ . अनिता जैन ‘विपुला’

Language: Hindi
1 Comment · 454 Views
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