Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Sep 2023 · 1 min read

मनोहन

मनमोहन

मनमोहन मुरली बजैया
श्याम छवि मन को लुभा रही
गोकुल में आज पधारे
यशोदा मां पालने झूल रही।
मधुर मुस्कान चंचल नयन
मोर मुकुट नटखट चितवन
यशोदा मां लोरी सुना रही।
तोतली मधुर बोली
मुख में माटी रख ली
लुकाछिपी खेल दौड़ रहे
यशोदा मां माखन मिश्री ला रही।
सांवली सूरत पीतांबर पहने
मंद मंद मुस्कान छवि सोहे
यशोदा मां लल्ला को निहार रही।
आधार में बंसी हृदय में राधे
जग के स्वामी भक्तकारज साधे
यशोदा मां कब से घर बुलाएं रही।
मनसीरत यह मन बावला
होता अधिक अधीर
कृष्ण लीला देखने लगी सीर
मैं भी करजोर कब से टेर लगाई रही।
– सीमा गुप्ता, अलवर राजस्थान

Language: Hindi
511 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
💐प्रेम कौतुक-462💐
💐प्रेम कौतुक-462💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
नजराना
नजराना
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
*दूर देश से आती राखी (हिंदी गजल)*
*दूर देश से आती राखी (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
होकर मजबूर हमको यार
होकर मजबूर हमको यार
gurudeenverma198
A heart-broken Soul.
A heart-broken Soul.
Manisha Manjari
#drArunKumarshastri
#drArunKumarshastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
गणतंत्र दिवस की बधाई।।
गणतंत्र दिवस की बधाई।।
Rajni kapoor
परिवार
परिवार
नवीन जोशी 'नवल'
मैं
मैं
Ranjana Verma
चांद सी चंचल चेहरा 🙏
चांद सी चंचल चेहरा 🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
तुम भी 2000 के नोट की तरह निकले,
तुम भी 2000 के नोट की तरह निकले,
Vishal babu (vishu)
अर्जुन सा तू तीर रख, कुंती जैसी पीर।
अर्जुन सा तू तीर रख, कुंती जैसी पीर।
Suryakant Dwivedi
मैंने अपनी, खिडकी से,बाहर जो देखा वो खुदा था, उसकी इनायत है सबसे मिलना, मैं ही खुद उससे जुदा था.
मैंने अपनी, खिडकी से,बाहर जो देखा वो खुदा था, उसकी इनायत है सबसे मिलना, मैं ही खुद उससे जुदा था.
Mahender Singh
जूते व जूती की महिमा (हास्य व्यंग)
जूते व जूती की महिमा (हास्य व्यंग)
Ram Krishan Rastogi
3295.*पूर्णिका*
3295.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जिंदगी का सफर
जिंदगी का सफर
Dr. Pradeep Kumar Sharma
भारत माँ के वीर सपूत
भारत माँ के वीर सपूत
Kanchan Khanna
"विचार-धारा
*Author प्रणय प्रभात*
अहसासे ग़मे हिज्र बढ़ाने के लिए आ
अहसासे ग़मे हिज्र बढ़ाने के लिए आ
Sarfaraz Ahmed Aasee
****शिरोमणि****
****शिरोमणि****
प्रेमदास वसु सुरेखा
मेरे जाने के बाद ,....
मेरे जाने के बाद ,....
ओनिका सेतिया 'अनु '
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
पल भर कि मुलाकात
पल भर कि मुलाकात
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
अरे शुक्र मनाओ, मैं शुरू में ही नहीं बताया तेरी मुहब्बत, वर्ना मेरे शब्द बेवफ़ा नहीं, जो उनको समझाया जा रहा है।
अरे शुक्र मनाओ, मैं शुरू में ही नहीं बताया तेरी मुहब्बत, वर्ना मेरे शब्द बेवफ़ा नहीं, जो उनको समझाया जा रहा है।
Anand Kumar
कभी कभी ज़िंदगी में लिया गया छोटा निर्णय भी बाद के दिनों में
कभी कभी ज़िंदगी में लिया गया छोटा निर्णय भी बाद के दिनों में
Paras Nath Jha
खुद की एक पहचान बनाओ
खुद की एक पहचान बनाओ
Vandna Thakur
चुका न पाएगा कभी,
चुका न पाएगा कभी,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
इंसान VS महान
इंसान VS महान
Dr MusafiR BaithA
ईमानदारी, दृढ़ इच्छाशक्ति
ईमानदारी, दृढ़ इच्छाशक्ति
Dr.Rashmi Mishra
संघर्षी वृक्ष
संघर्षी वृक्ष
Vikram soni
Loading...