Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Jan 2024 · 1 min read

मनहरण घनाक्षरी

घनाक्षरी छंद
कलकल छल-छल,बह रहा वेग साथ,
निर्मल पवित्र अति ,सरयू का नीर है।
हरे- भरे तरु दिखें ,भ्रमर पराग पिएँ,
नृत्य करें केकी झूम,गाए पिक, कीर है।
सजी-धजी खड़ी आज,करके सिंगार खूब,
लगती अयोध्या जी की,बदली तस्वीर है।
बन रहा भव्य नव्य,धाम प्रभु राम जी का,
रघुकुल तिलक की,मिटी सारी पीर है।।
डाॅ बिपिन पाण्डेय

1 Like · 1 Comment · 77 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बड़े होते बच्चे
बड़े होते बच्चे
Manu Vashistha
अपनी तो मोहब्बत की इतनी कहानी
अपनी तो मोहब्बत की इतनी कहानी
AVINASH (Avi...) MEHRA
सफलता का एक ही राज ईमानदारी, मेहनत और करो प्रयास
सफलता का एक ही राज ईमानदारी, मेहनत और करो प्रयास
Ashish shukla
बादलों पर घर बनाया है किसी ने...
बादलों पर घर बनाया है किसी ने...
डॉ.सीमा अग्रवाल
★डॉ देव आशीष राय सर ★
★डॉ देव आशीष राय सर ★
★ IPS KAMAL THAKUR ★
मैं भविष्य की चिंता में अपना वर्तमान नष्ट नहीं करता क्योंकि
मैं भविष्य की चिंता में अपना वर्तमान नष्ट नहीं करता क्योंकि
Rj Anand Prajapati
हमारा साथ और यह प्यार
हमारा साथ और यह प्यार
gurudeenverma198
नर नारी
नर नारी
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
"मुरीद"
Dr. Kishan tandon kranti
माली अकेला क्या करे ?,
माली अकेला क्या करे ?,
ओनिका सेतिया 'अनु '
राम छोड़ ना कोई हमारे..
राम छोड़ ना कोई हमारे..
Vijay kumar Pandey
कहा किसी ने
कहा किसी ने
Surinder blackpen
■ जय ब्रह्मांड 😊😊😊
■ जय ब्रह्मांड 😊😊😊
*Author प्रणय प्रभात*
नारी का सम्मान 🙏
नारी का सम्मान 🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
ग़ज़ल/नज़्म - आज़ मेरे हाथों और पैरों में ये कम्पन सा क्यूँ है
ग़ज़ल/नज़्म - आज़ मेरे हाथों और पैरों में ये कम्पन सा क्यूँ है
अनिल कुमार
गुम है सरकारी बजट,
गुम है सरकारी बजट,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
हमारे पास हार मानने के सभी कारण थे, लेकिन फिर भी हमने एक-दूस
हमारे पास हार मानने के सभी कारण थे, लेकिन फिर भी हमने एक-दूस
पूर्वार्थ
गरीबी हटाओं बनाम गरीबी घटाओं
गरीबी हटाओं बनाम गरीबी घटाओं
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
माँ नहीं मेरी
माँ नहीं मेरी
Dr fauzia Naseem shad
मेरी कलम......
मेरी कलम......
Naushaba Suriya
हमेशा गिरगिट माहौल देखकर रंग बदलता है
हमेशा गिरगिट माहौल देखकर रंग बदलता है
शेखर सिंह
कैनवास
कैनवास
Mamta Rani
मुझको तो घर जाना है
मुझको तो घर जाना है
Karuna Goswami
2323.पूर्णिका
2323.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
क्या देखा है मैंने तुझमें?....
क्या देखा है मैंने तुझमें?....
Amit Pathak
स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद
मनोज कर्ण
दाढ़ी-मूँछ धारी विशिष्ट देवता हैं विश्वकर्मा और ब्रह्मा
दाढ़ी-मूँछ धारी विशिष्ट देवता हैं विश्वकर्मा और ब्रह्मा
Dr MusafiR BaithA
बदलता चेहरा
बदलता चेहरा
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
2. काश कभी ऐसा हो पाता
2. काश कभी ऐसा हो पाता
Rajeev Dutta
आंखों से बयां नहीं होते
आंखों से बयां नहीं होते
Harminder Kaur
Loading...