Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 Jul 2023 · 1 min read

मंहगाई, भ्रष्टाचार,

मंहगाई, भ्रष्टाचार,
भुखमरी, बेरोज़गारी,
जन्म, मृत्यु और विकास पर
नियंत्रण हो या न हो मगर
उनकी दरों पर पूरा नियंत्रण है
हमारी विश्व-प्रसिद्ध सरकार का।।

■प्रणय प्रभात■

1 Like · 101 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बस फेर है नज़र का हर कली की एक अपनी ही बेकली है
बस फेर है नज़र का हर कली की एक अपनी ही बेकली है
Atul "Krishn"
गाँव की याद
गाँव की याद
Rajdeep Singh Inda
नगमे अपने गाया कर
नगमे अपने गाया कर
Suryakant Dwivedi
हाइकु (#हिन्दी)
हाइकु (#हिन्दी)
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
एक दिन में तो कुछ नहीं होता
एक दिन में तो कुछ नहीं होता
shabina. Naaz
गरीबी में सौन्दर्य है।
गरीबी में सौन्दर्य है।
Acharya Rama Nand Mandal
3086.*पूर्णिका*
3086.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
कौन कहता है छोटी चीजों का महत्व नहीं होता है।
कौन कहता है छोटी चीजों का महत्व नहीं होता है।
Yogendra Chaturwedi
🪷पुष्प🪷
🪷पुष्प🪷
सुरेश अजगल्ले 'इन्द्र '
शमा से...!!!
शमा से...!!!
Kanchan Khanna
जय भोलेनाथ ।
जय भोलेनाथ ।
Anil Mishra Prahari
आश्रय
आश्रय
goutam shaw
बदनसीब लाइका ( अंतरिक्ष पर भेजी जाने वाला पशु )
बदनसीब लाइका ( अंतरिक्ष पर भेजी जाने वाला पशु )
ओनिका सेतिया 'अनु '
आज का चयनित छंद
आज का चयनित छंद"रोला"अर्ध सम मात्रिक
rekha mohan
अपराह्न का अंशुमान
अपराह्न का अंशुमान
Satish Srijan
चश्मा,,,❤️❤️
चश्मा,,,❤️❤️
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
.......,,,
.......,,,
शेखर सिंह
मैं अगर आग में चूल्हे की यूँ जल सकती हूँ
मैं अगर आग में चूल्हे की यूँ जल सकती हूँ
Shweta Soni
#दोहा-
#दोहा-
*प्रणय प्रभात*
पचीस साल पुराने स्वेटर के बारे में / MUSAFIR BAITHA
पचीस साल पुराने स्वेटर के बारे में / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
बाढ़ का आतंक
बाढ़ का आतंक
surenderpal vaidya
हरियर जिनगी म सजगे पियर रंग
हरियर जिनगी म सजगे पियर रंग
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
गुमाँ हैं हमको हम बंदर से इंसाँ बन चुके हैं पर
गुमाँ हैं हमको हम बंदर से इंसाँ बन चुके हैं पर
Johnny Ahmed 'क़ैस'
बची रहे संवेदना...
बची रहे संवेदना...
डॉ.सीमा अग्रवाल
बोट डालणा फरज निभाणा -अरविंद भारद्वाज
बोट डालणा फरज निभाणा -अरविंद भारद्वाज
अरविंद भारद्वाज
*अपनेपन से भर सको, जीवन के कुछ रंग (कुंडलिया)*
*अपनेपन से भर सको, जीवन के कुछ रंग (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
“लिखें तो लिखें क्या ?”–व्यंग रचना
“लिखें तो लिखें क्या ?”–व्यंग रचना
Dr Mukesh 'Aseemit'
अमृत पीना चाहता हर कोई,खुद को रख कर ध्यान।
अमृत पीना चाहता हर कोई,खुद को रख कर ध्यान।
विजय कुमार अग्रवाल
Jo mila  nahi  wo  bhi  theek  hai.., jo  hai  mil  gaya   w
Jo mila nahi wo bhi theek hai.., jo hai mil gaya w
Rekha Rajput
"आय और उम्र"
Dr. Kishan tandon kranti
Loading...