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4 Apr 2024 · 1 min read

भीनी भीनी आ रही सुवास है।

भीनी भीनी आ रही सुवास है।
मदकता का हो रहा अहसास है।।
प्राकृति का सौंदर्य निहारो तो ,
मन में छा रहा नव उल्लास है।।
– ओमप्रकाश भार्गव
पिपरिया

1 Like · 32 Views
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