Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Jan 2022 · 1 min read

भींगा रुमाल

हँसते,
मुस्काते,
खिलखिलाते
आदमी का
पॉकेट सर्च करना,
तो तुम्हें वहाँ
भींगा रुमाल मिलेगा !
कि सिर्फ़ वक्त झुकता है,
किसी तानाशाह सामने !
वरना आदमी दिल से
कभी झुकता नहीं है !
यानी नकल शरीर के
बाहरी अंगों के
किये जा सकते हैं,
किसी के दिल की
कदापि नहीं !
कदर करो उनकी
तुमसे जो,
बिना मतलब
चाहत रखते हैं;
वरना दुनिया में
ख्याल रखनेवाले कम
और तकलीफ देनेवाले
ज्यादे ही हैं !

Language: Hindi
2 Likes · 379 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
शिव विनाशक,
शिव विनाशक,
shambhavi Mishra
24/252. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/252. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जिंदगी
जिंदगी
Bodhisatva kastooriya
*मेरे पापा*
*मेरे पापा*
Shashi kala vyas
ख्वाब हो गए हैं वो दिन
ख्वाब हो गए हैं वो दिन
shabina. Naaz
हिंदी मेरी माँ
हिंदी मेरी माँ
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
बड़ी अजब है जिंदगी,
बड़ी अजब है जिंदगी,
sushil sarna
दोहा
दोहा
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
सावन: मौसम- ए- इश्क़
सावन: मौसम- ए- इश्क़
Jyoti Khari
धर्म, ईश्वर और पैगम्बर
धर्म, ईश्वर और पैगम्बर
Dr MusafiR BaithA
वो काजल से धार लगाती है अपने नैनों की कटारों को ,,
वो काजल से धार लगाती है अपने नैनों की कटारों को ,,
Vishal babu (vishu)
जिसे मैं ने चाहा हद से ज्यादा,
जिसे मैं ने चाहा हद से ज्यादा,
Sandeep Mishra
"खुद के खिलाफ़"
Dr. Kishan tandon kranti
इतनी मिलती है तेरी सूरत से सूरत मेरी ‌
इतनी मिलती है तेरी सूरत से सूरत मेरी ‌
Phool gufran
मोहब्बत ना सही तू नफ़रत ही जताया कर
मोहब्बत ना सही तू नफ़रत ही जताया कर
Gouri tiwari
قفس میں جان جائے گی ہماری
قفس میں جان جائے گی ہماری
Simmy Hasan
हरी भरी तुम सब्ज़ी खाओ|
हरी भरी तुम सब्ज़ी खाओ|
Vedha Singh
जन्मदिन पर आपके दिल से यही शुभकामना।
जन्मदिन पर आपके दिल से यही शुभकामना।
सत्य कुमार प्रेमी
पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ
पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ
Buddha Prakash
गुमराह होने के लिए, हम निकल दिए ,
गुमराह होने के लिए, हम निकल दिए ,
Smriti Singh
सूरज का टुकड़ा...
सूरज का टुकड़ा...
Santosh Soni
#ग़ज़ल
#ग़ज़ल
*Author प्रणय प्रभात*
देश का दुर्भाग्य
देश का दुर्भाग्य
Shekhar Chandra Mitra
फूल खुशबू देते है _
फूल खुशबू देते है _
Rajesh vyas
नकाबपोश रिश्ता
नकाबपोश रिश्ता
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
फेसबुक
फेसबुक
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
विद्यादायिनी माँ
विद्यादायिनी माँ
Mamta Rani
Ghazal
Ghazal
shahab uddin shah kannauji
पड़ जाएँ मिरे जिस्म पे लाख़ आबले 'अकबर'
पड़ जाएँ मिरे जिस्म पे लाख़ आबले 'अकबर'
Dr Tabassum Jahan
कविता के हर शब्द का, होता है कुछ सार
कविता के हर शब्द का, होता है कुछ सार
Dr Archana Gupta
Loading...