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8 Nov 2016 · 1 min read

[[ भरोषा नहीं है मुझे अब किसी पर ]]

भरोषा नहीं है मुझे अब किसी पर
कई बार रोया हूँ मैं जिंदगी पर
**********
नही रास आता मुझे ये जमाना
हँसा जा रहा है मेरी सादगी पर
**********
सियासत मुहब्बत पे होती है यारो
हँसा है जमाना मेरी आशिक़ी पर
********
उड़ाने उडी थी मुहब्बत की मेने
गिराया खुदा ने मुझे अब नदी पर
**********
यक़ीनन तमाशा करेगा जमाना
यकीं ही नही है मुझे अब किसी पर

■■■■[ नितिन शर्मा ]■■■■

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