Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
31 May 2023 · 2 min read

बेटी की बिदाई ✍️✍️

बेटी की बिदाई ✍️

🙏❤️श्रद्धेय🌷🙏
पावन धरा आपके आथित्य
स्वीकार कर चरण कमलों

सुमन समर्पित करना चाहता
धन्य सौभाग्य है मेरा इस

दहलीज पैर पड़ा आपका
क्या वंदन अभिनंदन तीर्थ

जल से पैर पखारूं आसमां
तारों से आरती उतारूं भाव

विभोर स्वागत करना चाहता हुं
🙏 🙏 🙏 🙏 🙏
सद्गुण सद्‌भाव परख से
कन्या रत्न समर्पित करता हूँ

सुमन वाटिका छतरी में बेटी
की सुखद सुगम जीवनपथ

अभिलाषा कन्यार्पण उद्गार
व्यक्त की आशा रखता हूं

👸नन्हीं परी पग से मेरा
घर आंगन हुआ आवाद

मां की सूनी गोदी का
इनसे क्षण हुआ गुलजार

माँ अमृत से प्राण वायु पा
पली बड़ी जीवन संवारी

ममता का सागर मां की
मेरी आंखों का तारा है

कैसे कहुँ ✍️किस जतन
लाड़ प्यार से पाला हूँ

झटक पटक लटक
अपनी तूतली वाणी से

घर की ममता छीनी
सांझ उषा के आंगन में

गुंजन हास्य व्यंग छोड़
खामोश आपके घर चली

मां के नयनों का तारा
पिता लाड़ली औरों से

अनजान है ये बिटिया
नई पहचान बनाने आप

के साथ चली बिटिया
इससे तो चूक होगी ही🙏

क्षमाशीलता करुणा से
संस्कृति स्नेह संस्कारो से

राज दुलारी बना रखना👸
जन्म हुआ जब गीत बजी

न शहनाई पर आज विदाई
सुअवसर पर मेरे घर बजी

शहनाई इसे .सुन समझ मैं
मन ही मन हर्षित हो सुखद

परम कन्यादान कर पाया हूँ
भैया से बहना बिछड़ी बहनों

से बहना बिछड़ी मां की बेटी
चहल कदमी की याद छोड़

अमिट स्मृति चिन्ह ले अपनी
आशियाने चली बाप की बेटी

विदाई पर रोयेंगे सब परिजन
मां पिता भैया बहनें रोयेंगी

छ़लकेगी सागार नयन आंसू
बह जायेंगी स्नेह करूणा धार

कलेजे टुकड़े लक्ष्मी रत्नधन बेटी
कन्यादान जिम्मेंदारी पूरी करता हुं

इन दोनों की सुहाग इक जोड़ी
सिया राम पार्वती शंकर सी हो

हरा भरा रहे फूलों की बगिया
किलकारी गुंजे नव आंगन में

माता पिता निज अधिकार दे
समर्पित करता हूं अपनी बिटिया

नादान निर्धन हुं सम्पन्न नहीं
राज वैभव ना दे पाऊंगा पर

शबरी के जूठे बेर विदुर के साग
सुदामा के तण्डुल से आवो भगत

जरूर करूंगा मैं जरूर करूंगा मैं ॥
🌹 🙏 🌹 🙏 🌹 🙏

तारकेशवर प्रसाद तरूण

Language: Hindi
6 Likes · 177 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
View all
You may also like:
कौआ और कोयल ( दोस्ती )
कौआ और कोयल ( दोस्ती )
VINOD CHAUHAN
नाजायज इश्क
नाजायज इश्क
RAKESH RAKESH
कुछ पल साथ में आओ हम तुम बिता लें
कुछ पल साथ में आओ हम तुम बिता लें
Pramila sultan
मौज-मस्ती
मौज-मस्ती
Vandna Thakur
मां कालरात्रि
मां कालरात्रि
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
नास्तिक
नास्तिक
ओंकार मिश्र
रात
रात
sushil sarna
मेघ गोरे हुए साँवरे
मेघ गोरे हुए साँवरे
Dr Archana Gupta
वह जो रुखसत हो गई
वह जो रुखसत हो गई
श्याम सिंह बिष्ट
अपनी इच्छाओं में उलझा हुआ मनुष्य ही गरीब होता है, गरीब धोखा
अपनी इच्छाओं में उलझा हुआ मनुष्य ही गरीब होता है, गरीब धोखा
Sanjay ' शून्य'
Bikhari yado ke panno ki
Bikhari yado ke panno ki
Sakshi Tripathi
उसे गवा दिया है
उसे गवा दिया है
Awneesh kumar
दिलाओ याद मत अब मुझको, गुजरा मेरा अतीत तुम
दिलाओ याद मत अब मुझको, गुजरा मेरा अतीत तुम
gurudeenverma198
2985.*पूर्णिका*
2985.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
♤⛳मातृभाषा हिन्दी हो⛳♤
♤⛳मातृभाषा हिन्दी हो⛳♤
SPK Sachin Lodhi
* इंसान था रास्तों का मंजिल ने मुसाफिर ही बना डाला...!
* इंसान था रास्तों का मंजिल ने मुसाफिर ही बना डाला...!
Vicky Purohit
माँ महान है
माँ महान है
Dr. Man Mohan Krishna
सत्साहित्य सुरुचि उपजाता, दूर भगाता है अज्ञान।
सत्साहित्य सुरुचि उपजाता, दूर भगाता है अज्ञान।
महेश चन्द्र त्रिपाठी
भ्रात प्रेम का रूप है,
भ्रात प्रेम का रूप है,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
💐प्रेम कौतुक-393💐
💐प्रेम कौतुक-393💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
बैरी डायबिटीज (हास्य कुंडलिया)
बैरी डायबिटीज (हास्य कुंडलिया)
Ravi Prakash
इंसान
इंसान
Vandna thakur
"लिख सको तो"
Dr. Kishan tandon kranti
अज्ञात है हम भी अज्ञात हो तुम भी...!
अज्ञात है हम भी अज्ञात हो तुम भी...!
Aarti sirsat
चांद सितारे चाहत हैं तुम्हारी......
चांद सितारे चाहत हैं तुम्हारी......
Neeraj Agarwal
आजादी की कहानी
आजादी की कहानी
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
कब तक कौन रहेगा साथी
कब तक कौन रहेगा साथी
Ramswaroop Dinkar
कुछ नमी
कुछ नमी
Dr fauzia Naseem shad
■ आज का मुक्तक
■ आज का मुक्तक
*Author प्रणय प्रभात*
कानून?
कानून?
nagarsumit326
Loading...