Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 May 2018 · 1 min read

बुढ़ापे की सौगात

विषय- “बुढ़ापे की सौगात”

है बुढ़ापे का तकाज़ा दिल लगाना चाहिए।
धूल दर्पण पर जमीं उसको हटाना चाहिए।

भूल पाते हम नहीं गुज़रा ज़माना चाहकर
हर किसीको अब यहाँ कोई दिवाना चाहिए।

देख फिर रहमत मयस्सर आज इतनी कर ख़ुदा!
वक्त जैसा भी हो लेकिन मुस्कुराना चाहिए।

साल सैंतिस भी मिले छोटा मुझे तो क्या ग़िला
प्यार की प्यासी नज़र को आज़माना चाहिए।

ज़ुल्फ़ से बूँदें गिरीं तो इक मुसाफ़िर हँस दिया
दूसरे दिन छेड़ने को इक बहाना चाहिए।

लोग दिल को थामकर देखा करें जब रास्ता
इक भरोसा यार के दिल में जगाना चाहिए।

दिल्लगी में दिल अगर ये खो गया तो क्या हुआ
एक मौसम हम बुज़ुर्गों को सुहाना चाहिए।

इश्क शर्तों पे किया जाता नहीं ‘रजनी’ कभी
ता क़यामत रस्म उल्फ़त को निभाना चाहिए।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
महमूरगंज,वाराणसी।
संपादिका-साहित्य धरोहर

449 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना'
View all
You may also like:
सहारा...
सहारा...
Naushaba Suriya
ज़ख्म पर ज़ख्म अनगिनत दे गया
ज़ख्म पर ज़ख्म अनगिनत दे गया
Ramji Tiwari
किस बात का गुमान है यारो
किस बात का गुमान है यारो
Anil Mishra Prahari
मुझे भी जीने दो (भ्रूण हत्या की कविता)
मुझे भी जीने दो (भ्रूण हत्या की कविता)
Dr. Kishan Karigar
होली के दिन
होली के दिन
Ghanshyam Poddar
अफ़सोस
अफ़सोस
Dipak Kumar "Girja"
3240.*पूर्णिका*
3240.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*श्रद्धेय रामप्रकाश जी की जीवनी मार्गदर्शन है (प्रसिद्ध कवि
*श्रद्धेय रामप्रकाश जी की जीवनी मार्गदर्शन है (प्रसिद्ध कवि
Ravi Prakash
फूल मुरझाए के बाद दोबारा नई खिलय,
फूल मुरझाए के बाद दोबारा नई खिलय,
Krishna Kumar ANANT
किस बात का गुमान है
किस बात का गुमान है
भरत कुमार सोलंकी
■ चुनावी साल के चतुर चुरकुट।।
■ चुनावी साल के चतुर चुरकुट।।
*प्रणय प्रभात*
अतीत
अतीत
Bodhisatva kastooriya
सियासत नहीं रही अब शरीफों का काम ।
सियासत नहीं रही अब शरीफों का काम ।
ओनिका सेतिया 'अनु '
परहेज बहुत करते है दौलतमंदो से मिलने में हम
परहेज बहुत करते है दौलतमंदो से मिलने में हम
शिव प्रताप लोधी
"" *समय धारा* ""
सुनीलानंद महंत
मन चाहे कुछ कहना .. .. !!
मन चाहे कुछ कहना .. .. !!
Kanchan Khanna
.........?
.........?
शेखर सिंह
कोई ऐसा बोलता है की दिल में उतर जाता है
कोई ऐसा बोलता है की दिल में उतर जाता है
कवि दीपक बवेजा
सूरज जैसन तेज न कौनौ चंदा में।
सूरज जैसन तेज न कौनौ चंदा में।
सत्य कुमार प्रेमी
What Is Love?
What Is Love?
Vedha Singh
तुम बस ज़रूरत ही नहीं,
तुम बस ज़रूरत ही नहीं,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
फ़ितरत का रहस्य
फ़ितरत का रहस्य
Buddha Prakash
किताब
किताब
Sûrëkhâ
आपके द्वारा हुई पिछली गलतियों को वर्तमान में ना दोहराना ही,
आपके द्वारा हुई पिछली गलतियों को वर्तमान में ना दोहराना ही,
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
तुम्ही ने दर्द दिया है,तुम्ही दवा देना
तुम्ही ने दर्द दिया है,तुम्ही दवा देना
Ram Krishan Rastogi
अब नये साल में
अब नये साल में
डॉ. शिव लहरी
"शाम-सवेरे मंदिर जाना, दीप जला शीश झुकाना।
आर.एस. 'प्रीतम'
"फूल बिखेरता हुआ"
Dr. Kishan tandon kranti
चलो आज वक्त से कुछ फरियाद करते है....
चलो आज वक्त से कुछ फरियाद करते है....
रुचि शर्मा
कुछ बातों का ना होना अच्छा,
कुछ बातों का ना होना अच्छा,
Ragini Kumari
Loading...