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15 May 2024 · 1 min read

बुंदेली_मुकरियाँ

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#राजीव_नामदेव “#राना_लिधौरी”

#बुंदेली_मुकरियाँ*

दिखत गुनन से भौत छबीला |
मौनौ आकै बनत रँगीला |
संग न छोड़े जब से भाँउर –
का री साजन ? नाँ री माँउर |

अब तौ मौरो पेट पिराबै |
यैसौ ‌लगबै अब कै आबै |
साँसी मैने तौसे उगली –
ऐ री हौने ? नाँ री -चुगली |

गुइयाँ ऊसै खुद मैं उरजी ‌|
चली औइ की मौपे मरजी |
पीरी पर गइ चढ़ गइ गरदी –
का री बालम ? नाँ री हरदी ‌|

नाक पकर कै हँसबौ हौबे |
इक दूजै में सासउँ खौबे ||
आपस में समझत हैं कथनी –
ऐ री साजन ? नाँ री नथनी |

ऊ खौं देखत मन हरसाबे ‌|
नौनों लगतइ तौसे काबे |
मन कौ लगतइ है चित चोर –
का री साजन ? नाँ री मोर |

बिर्रा अपने बार रखत है |
ठाड़ौ आँगन से हेरत है |
हाथन आबै बनत जुगाडू –
का री बालम ? नाँ री झाडू |

अपनी कीमत भौत बताबै |
मौरे सँग खौं दौरत आबै |
मौरे लेंगर लगै सलोना-
का री बालम ? नाँ री सोना |

मौरी छाती सैं आ चिपके |
रबै सबइँ से साँसउँ छिपके |
मैं भी चिपका कै रत भोली –
का री साजन ? नाँ री चोली |
*** दिनांक-15-5-2024
©- #राजीव_नामदेव “#राना_लिधौरी”
संपादक “आकांक्षा” पत्रिका
संपादक “अनुश्रुति” त्रैमासिक बुंदेलीक्षपत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email – ranalidhori@gmail.com

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