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19 Apr 2021 · 1 min read

सुन्दर घर

घर मेरा है इतना सुंदर,
रहते इसके पेड़ पर बंदर ।

पंक्ति लगाकर चलती चींटी,
अनुशासन सिखलाती फिर भी ।

चूहा मेरे घर के बिल में,
अनाज खाता कुतर- कुतर कर ।

चुपके- चुपके बिल्ली आती,
बच्चों का दूध पी जाती।

पूंँछ हिलाता मेरे घर पर,
श्वान देखता अपरिचित जन को ।

मकड़ी मेरे घर की रानी,
बुनती जाल कीट है खाती ।

छोटी चिड़िया बालकनी पर,
बच्चों को दाना चुंँगाती ।

सरपट चलाती दीवारों पर,
छिपकली से डरते हैं सब ।

मांँ भी मेरी प्यारी- प्यारी,
छोटी-छोटी बातें सिखाती ।

रचनाकार ✍🏼✍🏼
बुद्ध प्रकाश,
मौदहा हमीरपुर।

11 Likes · 8 Comments · 626 Views
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