Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Aug 2016 · 1 min read

“बस रोक रखी थी”

टूट तो मैं कब की चुकी थी,
बस रोक रखी थी,खुद को बिखरने से|
एक कतरा समेटती,तो दूसरा छूट जाता,
फिर भी कोशिशें करती रहती,समेटने की,
साँसें थामी थीं ,कि कहीं थम न जाये,
बस कुछ और पल,शायद ज़िंदगी की समेट लूँ ,
बस रोक रखी थी, खुद को बिखरने से |
कशमकश तो देखिये,समेटने-बिखरने में ,
मैं तो खुद से ही छूट गयी,
अपने छूटे,सपने टूटे बंधन में ,
अनुबन्धन में जाने कितने रूठे,
जीतने की कोशिश में मैं तो हार गयी,
बस रोक रखी थी, खुद को बिखरने से||
…निधि…

Language: Hindi
363 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from डा0 निधि श्रीवास्तव "सरोद"
View all
You may also like:
दगा बाज़ आसूं
दगा बाज़ आसूं
Surya Barman
क़दर करके क़दर हासिल हुआ करती ज़माने में
क़दर करके क़दर हासिल हुआ करती ज़माने में
आर.एस. 'प्रीतम'
* एक कटोरी में पानी ले ,चिड़ियों को पिलवाओ जी【हिंदी गजल/गीतिक
* एक कटोरी में पानी ले ,चिड़ियों को पिलवाओ जी【हिंदी गजल/गीतिक
Ravi Prakash
एक गुनगुनी धूप
एक गुनगुनी धूप
Saraswati Bajpai
"कैसे सबको खाऊँ"
लक्ष्मीकान्त शर्मा 'रुद्र'
चंद्र ग्रहण के बाद ही, बदलेगी तस्वीर
चंद्र ग्रहण के बाद ही, बदलेगी तस्वीर
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
आईना...
आईना...
डॉ.सीमा अग्रवाल
■ आज की सलाह। धूर्तों के लिए।।
■ आज की सलाह। धूर्तों के लिए।।
*Author प्रणय प्रभात*
"फर्क"-दोनों में है जीवन
Dr. Kishan tandon kranti
*चैतन्य एक आंतरिक ऊर्जा*
*चैतन्य एक आंतरिक ऊर्जा*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
अपने होने का
अपने होने का
Dr fauzia Naseem shad
कैलाश चन्द्र चौहान की यादों की अटारी / मुसाफ़िर बैठा
कैलाश चन्द्र चौहान की यादों की अटारी / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
के जब तक दिल जवां होता नहीं है।
के जब तक दिल जवां होता नहीं है।
सत्य कुमार प्रेमी
प्यार
प्यार
Anil chobisa
गुरु श्रेष्ठ
गुरु श्रेष्ठ
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
कब तक यही कहे
कब तक यही कहे
मानक लाल मनु
इंद्रधनुष सी जिंदगी
इंद्रधनुष सी जिंदगी
Dr Parveen Thakur
सांवले मोहन को मेरे वो मोहन, देख लें ना इक दफ़ा
सांवले मोहन को मेरे वो मोहन, देख लें ना इक दफ़ा
The_dk_poetry
मेरी मुस्कान भी, अब नागवार है लगे उनको,
मेरी मुस्कान भी, अब नागवार है लगे उनको,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
पहले प्यार का एहसास
पहले प्यार का एहसास
Surinder blackpen
हवायें तितलियों के पर काट लेती हैं
हवायें तितलियों के पर काट लेती हैं
कवि दीपक बवेजा
नैन
नैन
TARAN VERMA
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
अपने आलोचकों को कभी भी नजरंदाज नहीं करें। वही तो है जो आपकी
अपने आलोचकों को कभी भी नजरंदाज नहीं करें। वही तो है जो आपकी
Paras Nath Jha
स्वयंसिद्धा
स्वयंसिद्धा
ऋचा पाठक पंत
बनेड़ा रै इतिहास री इक झिळक.............
बनेड़ा रै इतिहास री इक झिळक.............
लक्की सिंह चौहान
उपहार
उपहार
Satish Srijan
मेरा गुरूर है पिता
मेरा गुरूर है पिता
VINOD CHAUHAN
अश्लील साहित्य
अश्लील साहित्य
Sanjay ' शून्य'
मुझे भी जीने दो (भ्रूण हत्या की कविता)
मुझे भी जीने दो (भ्रूण हत्या की कविता)
Dr. Kishan Karigar
Loading...