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4 Feb 2023 · 1 min read

बसंत ऋतु

कुकुभ छंद

विषय- बसंत ऋतु
मात्रा- 16/14
अंत,-22
पहन बसंती साफा छुपकर,कौन चमन शर्माता है?
कली-कली से लाड़
लड़ाए,पात-पात भरमाता है।
तरुवर -तरुवर झूम झूम कर, अंग अंग महकाता है।
छेड़ -छेड़ कर डाल- डाल को, सोई नींद जगाता है।

चंद्र- चांदनी आ नहलाए, ओस उवटन लगाता है।
केश विन्यास करे मारुती, प्रभात रंग रचाता है।
देह धारण करे पीत वसन, मधुर गंध महकाता है।
कदम-कदम पर रंग सुनहरा,दिनकर आ फैलाता है।

पवन रथ पर हो सवार जब,सन-सन राग सुनाता है।
झूम उठी है बेला -बेला, खग कलरव बढ़ जाता है।
जीव जगत भी प्रेमातुर हो,नित-नित स्वांग रचाता है।
सब ऋतुओं का‌ राजा जब-जब ,झूम जगत में आता है।

ललिता कश्यप जिला बिलासपुर हिमाचल प्रदेश

Language: Hindi
73 Views
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