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30 Jul 2016 · 1 min read

“बरसो नयन से”

ओ गगन के बादलों ,
नीर बन बरसो नयन से,
तन तो भीगे मन भी भीगे ,
भीगे अन्तरघट सारा,
ऐसे बरसो धार बनकर ,
अंक मेरी सरिता बने,
बहती- बहती जाकर मिले,
कोई गहरे सागर से,
सागर का मंथन हो जब ,
कोई हलाहल पी जाये,
बन जाये वो मेरे लिये,
नीलकंठ ओंकारा |
…निधि…

Language: Hindi
2 Comments · 467 Views
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