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Nov 18, 2016 · 1 min read

बचपन

मैं अक्सर सोचती हूं
रात के गहरे अंधेरो में
न जाने क्यूं वो बीते पल
अभी भी मुझमें ज़िंदा हैं
मुझे अक्सर ही लगता है
शहर शमशान हो जैसे
ये रातें सो रहीं हैं और
बचपन जागता क्यूं है।

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