Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Feb 2022 · 1 min read

“फुर्क़त”

“फुर्क़त”
???

कुछ पल की फुर्क़त है झेलना मुश्किल ।
जब एक ही धड़कन में धड़कते दो दिल।
तलाशती रहती है निगाहें अपलक तुम्हें ;
जब तक फिर से ना जाते हो तुम मिल ।।

“स्वरचित एवं मौलिक”।
अजित कुमार “कर्ण” ✍️✍️
किशनगंज ( बिहार )
दिनांक : 08 / 02 / 2022.
“””””””””””””””””””””””””””””””””
?????????

Language: Hindi
6 Likes · 2 Comments · 522 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
23/95.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/95.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
8. टूटा आईना
8. टूटा आईना
Rajeev Dutta
— नारी न होती तो —
— नारी न होती तो —
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
प्रकृति
प्रकृति
Seema Garg
यही मेरे दिल में ख्याल चल रहा है तुम मुझसे ख़फ़ा हो या मैं खुद
यही मेरे दिल में ख्याल चल रहा है तुम मुझसे ख़फ़ा हो या मैं खुद
Ravi Betulwala
बेवक़ूफ़
बेवक़ूफ़
Otteri Selvakumar
RKASHA BANDHAN
RKASHA BANDHAN
डी. के. निवातिया
"कबड्डी"
Dr. Kishan tandon kranti
जिंदगी जी कुछ अपनों में...
जिंदगी जी कुछ अपनों में...
Umender kumar
हम शिक्षक
हम शिक्षक
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
चंदा मामा सुनो ना मेरी बात 🙏
चंदा मामा सुनो ना मेरी बात 🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
संस्कृत के आँचल की बेटी
संस्कृत के आँचल की बेटी
Er.Navaneet R Shandily
गिरगिट रंग बदलने लगे हैं
गिरगिट रंग बदलने लगे हैं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
तूझे क़ैद कर रखूं ऐसा मेरी चाहत नहीं है
तूझे क़ैद कर रखूं ऐसा मेरी चाहत नहीं है
Keshav kishor Kumar
ज़िंदगी मौत पर
ज़िंदगी मौत पर
Dr fauzia Naseem shad
माँ का घर
माँ का घर
Pratibha Pandey
झरना का संघर्ष
झरना का संघर्ष
Buddha Prakash
🙅पक्का वादा🙅
🙅पक्का वादा🙅
*प्रणय प्रभात*
होगे बहुत ज़हीन, सवालों से घिरोगे
होगे बहुत ज़हीन, सवालों से घिरोगे
Shweta Soni
मिल जाएँगे कई सिकंदर कलंदर इस ज़माने में मगर,
मिल जाएँगे कई सिकंदर कलंदर इस ज़माने में मगर,
शेखर सिंह
तुम ऐसे उम्मीद किसी से, कभी नहीं किया करो
तुम ऐसे उम्मीद किसी से, कभी नहीं किया करो
gurudeenverma198
सुलोचना
सुलोचना
Santosh kumar Miri
पता नहीं कब लौटे कोई,
पता नहीं कब लौटे कोई,
महेश चन्द्र त्रिपाठी
फायदे का सौदा
फायदे का सौदा
ओनिका सेतिया 'अनु '
बदलती हवाओं की परवाह ना कर रहगुजर
बदलती हवाओं की परवाह ना कर रहगुजर
VINOD CHAUHAN
स्नेह
स्नेह
Shashi Mahajan
"बिलखती मातृभाषा "
DrLakshman Jha Parimal
*
*"सीता जी का अवतार"*
Shashi kala vyas
हिंदी दिवस
हिंदी दिवस
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
भारत मां की लाज रखो तुम देश के सर का ताज बनो
भारत मां की लाज रखो तुम देश के सर का ताज बनो
कवि दीपक बवेजा
Loading...