Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Oct 2022 · 1 min read

फिर क्युं कहते हैं लोग

फिर क्युं कहते हैं लोग

बुरा हूं मैं,
‘पर कोई बुराई नजर नहीं आती मुझेमें’ कहते हैं लोग।
धुला नहीं मैं दूध का,
‘कोई बुराई नहीं है मुझमें’ फिर क्युं कहते हैं लोग?

अच्छा हूं मैं,
‘पर कोई अच्छाई नजर नहीं आती मुझमें’ कहते हैं लोग।
दिल भी मेरा सोने का,
‘कोई अच्छाई नहीं है मुझमें’, फिर क्युं कहते हैं लोग?

#seematuhaina

4 Likes · 5 Comments · 209 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बिछड़ के नींद से आँखों में बस जलन होगी।
बिछड़ के नींद से आँखों में बस जलन होगी।
Prashant mishra (प्रशान्त मिश्रा मन)
लिखें और लोगों से जुड़ना सीखें
लिखें और लोगों से जुड़ना सीखें
DrLakshman Jha Parimal
जनता के आगे बीन बजाना ठीक नहीं है
जनता के आगे बीन बजाना ठीक नहीं है
कवि दीपक बवेजा
ख़ुद को ख़ोकर
ख़ुद को ख़ोकर
Dr fauzia Naseem shad
अंत समय
अंत समय
Vandna thakur
तारों जैसी आँखें ,
तारों जैसी आँखें ,
SURYA PRAKASH SHARMA
*बादल दोस्त हमारा (बाल कविता)*
*बादल दोस्त हमारा (बाल कविता)*
Ravi Prakash
"बस्तर के वनवासी"
Dr. Kishan tandon kranti
यक्ष प्रश्न
यक्ष प्रश्न
Mamta Singh Devaa
💐प्रेम कौतुक-256💐
💐प्रेम कौतुक-256💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
क्या होगा लिखने
क्या होगा लिखने
Suryakant Dwivedi
भेद नहीं ये प्रकृति करती
भेद नहीं ये प्रकृति करती
Buddha Prakash
बहाव के विरुद्ध कश्ती वही चला पाते जिनका हौसला अंबर की तरह ब
बहाव के विरुद्ध कश्ती वही चला पाते जिनका हौसला अंबर की तरह ब
Dr.Priya Soni Khare
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Mukesh Kumar Sonkar
हकीकत
हकीकत
dr rajmati Surana
पावस
पावस
लक्ष्मी सिंह
■ यक़ीन मानिएगा...
■ यक़ीन मानिएगा...
*Author प्रणय प्रभात*
उम्मीदें  लगाना  छोड़  दो...
उम्मीदें लगाना छोड़ दो...
Aarti sirsat
मां की ममता जब रोती है
मां की ममता जब रोती है
Harminder Kaur
जब कभी भी मुझे महसूस हुआ कि जाने अनजाने में मुझसे कोई गलती ह
जब कभी भी मुझे महसूस हुआ कि जाने अनजाने में मुझसे कोई गलती ह
ruby kumari
*A date with my crush*
*A date with my crush*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
सुख दुःख
सुख दुःख
जगदीश लववंशी
एक तरफ तो तुम
एक तरफ तो तुम
Dr Manju Saini
तुम
तुम
Punam Pande
छोटी-छोटी बातों से, ऐ दिल परेशाँ न हुआ कर,
छोटी-छोटी बातों से, ऐ दिल परेशाँ न हुआ कर,
_सुलेखा.
शाकाहारी बने
शाकाहारी बने
Sanjay ' शून्य'
बिना कोई परिश्रम के, न किस्मत रंग लाती है।
बिना कोई परिश्रम के, न किस्मत रंग लाती है।
सत्य कुमार प्रेमी
हमारे जैसी दुनिया
हमारे जैसी दुनिया
Sangeeta Beniwal
अभी बाकी है
अभी बाकी है
Vandna Thakur
मज़दूर
मज़दूर
Shekhar Chandra Mitra
Loading...