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Jan 21, 2017 · 1 min read

” फिर आ गए चुनाव”

फिर आयी गति में स्वयं,,आरक्षण की नाव!
निश्चित भारत वर्ष मे..फिर आ गये चुनाव!!

बिरयानी बँटने लगी,बँटने लगा पुलाव !
शायद मेरे देश में, फिर आ गए चुनाव !!

खूब दिए हैं आज तक, महंगाई ने घाव !
इसे बढाने के लिए ,फिर आ गए चुनाव !!
रमेश शर्मा

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