Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Jul 2023 · 1 min read

“फितरत”

नकाब फ़ितरत का उठाओ तो,
चेहरे में शियासत दिखती है।
छल कपट के धन दौलत, फ़ितरत भरी सोहरत ।
सब एक न एक दिन, बेनकाब हो जाती है।

बरकत नही होता इंसान के दोगलेपन में,
हमारी आस्था से तुच्छ हरकत करते हैं।
इंसानियत ही इंसान को आगे बढ़ाती है,
मर्यादा में जो रहते हैं फ़ितरत से घिन आती है।

इंतजार मत करना जिनमे फ़ितरत हावी है,
एतबार मत करना जिनके मन मे आरी है।
फ़ितरत कब हमला कर दे ,
जिनके हाथ कुल्हाड़ी है।

इंसान जो ना बन सका ,
वो इंसान के खून का प्यासा है।
ऊपर से प्रेम दिखाता है,
देता उसको झांसा है।

ऐसे इंसानो से दूर रहो,
जो फ़ितरत के कारोबार किये।
कितनो के विश्वास को लूटे,
कितनो के घर को वो लूटे।

हो जाओ होशियार यारों,
फ़ितरत की चोरबाजारी में।
फ़ितरत लिए दिल मे प्रेम करते हैं ,
दूर उनसे हो जाओ तो मलाल करते हैं।

अरे शर्म नही आती फ़ितरत है दिल मे,
तो मलाल किस बात की ।
अब तुझसे क्या ही पूछें,
तेरी इस फ़ितरत पर क्या सवाल करें।

इंसानियत और फ़ितरत की कभी नही बनती,
जिनकी बनती हैं तो जिंदगी आगे नही बढ़ती।

लेखिका:- एकता श्रीवास्तव।
प्रयागराज✍️

8 Likes · 4 Comments · 265 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ekta chitrangini
View all
You may also like:
*** बिंदु और परिधि....!!! ***
*** बिंदु और परिधि....!!! ***
VEDANTA PATEL
रक्षाबंधन (कुंडलिया)
रक्षाबंधन (कुंडलिया)
दुष्यन्त 'बाबा'
इसके जैसा
इसके जैसा
Dr fauzia Naseem shad
खो कर खुद को,
खो कर खुद को,
Pramila sultan
स्त्रियां पुरुषों से क्या चाहती हैं?
स्त्रियां पुरुषों से क्या चाहती हैं?
अभिषेक किसनराव रेठे
गुरु श्रेष्ठ
गुरु श्रेष्ठ
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
तभी तो असाधारण ये कहानी होगी...!!!!!
तभी तो असाधारण ये कहानी होगी...!!!!!
Jyoti Khari
दूध-जले मुख से बिना फूंक फूंक के कही गयी फूहड़ बात! / MUSAFIR BAITHA
दूध-जले मुख से बिना फूंक फूंक के कही गयी फूहड़ बात! / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
हटा लो नजरे तुम
हटा लो नजरे तुम
शेखर सिंह
पैसा सौगात के नाम पर बंटे
पैसा सौगात के नाम पर बंटे
*Author प्रणय प्रभात*
दोहा त्रयी. . . . .
दोहा त्रयी. . . . .
sushil sarna
क्या रावण अभी भी जिन्दा है
क्या रावण अभी भी जिन्दा है
Paras Nath Jha
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
गुड़िया
गुड़िया
Dr. Pradeep Kumar Sharma
पिता (मर्मस्पर्शी कविता)
पिता (मर्मस्पर्शी कविता)
Dr. Kishan Karigar
ऑनलाईन शॉपिंग।
ऑनलाईन शॉपिंग।
लक्ष्मी सिंह
नाम कमाले ये जिनगी म, संग नई जावय धन दौलत बेटी बेटा नारी।
नाम कमाले ये जिनगी म, संग नई जावय धन दौलत बेटी बेटा नारी।
Ranjeet kumar patre
सफ़र आसान हो जाए मिले दोस्त ज़बर कोई
सफ़र आसान हो जाए मिले दोस्त ज़बर कोई
आर.एस. 'प्रीतम'
घर-घर एसी लग रहे, बढ़ा धरा का ताप।
घर-घर एसी लग रहे, बढ़ा धरा का ताप।
डॉ.सीमा अग्रवाल
3116.*पूर्णिका*
3116.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
नज़्म तुम बिन कोई कही ही नहीं।
नज़्म तुम बिन कोई कही ही नहीं।
Neelam Sharma
"मुद्रा"
Dr. Kishan tandon kranti
'तिमिर पर ज्योति'🪔🪔
'तिमिर पर ज्योति'🪔🪔
पंकज कुमार कर्ण
गुज़रा हुआ वक्त
गुज़रा हुआ वक्त
Surinder blackpen
कभी कभी प्रतीक्षा
कभी कभी प्रतीक्षा
पूर्वार्थ
*मनु-शतरूपा ने वर पाया (चौपाइयॉं)*
*मनु-शतरूपा ने वर पाया (चौपाइयॉं)*
Ravi Prakash
नहीं रखा अंदर कुछ भी दबा सा छुपा सा
नहीं रखा अंदर कुछ भी दबा सा छुपा सा
Rekha Drolia
महावीर उत्तरांचली आप सभी के प्रिय कवि
महावीर उत्तरांचली आप सभी के प्रिय कवि
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
तुम रंगदारी से भले ही,
तुम रंगदारी से भले ही,
Dr. Man Mohan Krishna
जीवन के रूप (कविता संग्रह)
जीवन के रूप (कविता संग्रह)
Pakhi Jain
Loading...