Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Feb 2017 · 1 min read

ज्ञान-दीपक

सूर्य डरता ना कभी भी बदलियों के राज से।
कुछ समय तक छिपे पर वह पुनि उगेगा नाज से।
मग के पत्थर रोक सकते न कभी आलोक-डग।
ज्ञान-दीपक जगमगाते हर्ष बन ऋतुराज से।
………………………………….
✓इस मुक्तक को मेरी कृति “पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं” में भी पढ़ा जा सकता है।
✓”पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं” कृति का द्वितीय संस्करण अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।

बृजेश कुमार नायक

Language: Hindi
1 Like · 718 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Pt. Brajesh Kumar Nayak
View all
You may also like:
उसको उसके घर उतारूंगा मैं अकेला ही घर जाऊंगा
उसको उसके घर उतारूंगा मैं अकेला ही घर जाऊंगा
कवि दीपक बवेजा
मेरे दिल की हर इक वो खुशी बन गई
मेरे दिल की हर इक वो खुशी बन गई
कृष्णकांत गुर्जर
श्रीराम मंगल गीत।
श्रीराम मंगल गीत।
Acharya Rama Nand Mandal
भोले नाथ तेरी सदा ही जय
भोले नाथ तेरी सदा ही जय
नेताम आर सी
అదే శ్రీ రామ ధ్యానము...
అదే శ్రీ రామ ధ్యానము...
डॉ गुंडाल विजय कुमार 'विजय'
दिन सुखद सुहाने आएंगे...
दिन सुखद सुहाने आएंगे...
डॉ.सीमा अग्रवाल
💐प्रेम कौतुक-446💐
💐प्रेम कौतुक-446💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
दीवारों की चुप्पी में राज हैं दर्द है
दीवारों की चुप्पी में राज हैं दर्द है
Sangeeta Beniwal
प्यार का रिश्ता
प्यार का रिश्ता
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
दस्ताने
दस्ताने
Seema gupta,Alwar
मंदिर का न्योता ठुकराकर हे भाई तुमने पाप किया।
मंदिर का न्योता ठुकराकर हे भाई तुमने पाप किया।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
18- ऐ भारत में रहने वालों
18- ऐ भारत में रहने वालों
Ajay Kumar Vimal
■ ग़ज़ल (वीक एंड स्पेशल) -
■ ग़ज़ल (वीक एंड स्पेशल) -
*Author प्रणय प्रभात*
बधाई हो बधाई, नये साल की बधाई
बधाई हो बधाई, नये साल की बधाई
gurudeenverma198
बात मेरी मान लो - कविता
बात मेरी मान लो - कविता
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
प्रकृति को जो समझे अपना
प्रकृति को जो समझे अपना
Buddha Prakash
" रिन्द (शराबी) "
Dr. Kishan tandon kranti
फितरत ना बदल सका
फितरत ना बदल सका
goutam shaw
ग़ज़ल
ग़ज़ल
rekha mohan
Hum tumhari giraft se khud ko azad kaise kar le,
Hum tumhari giraft se khud ko azad kaise kar le,
Sakshi Tripathi
नज़्म
नज़्म
Shiva Awasthi
*सपनों का बादल*
*सपनों का बादल*
Poonam Matia
*हटता है परिदृश्य से, अकस्मात इंसान (कुंडलिया)*
*हटता है परिदृश्य से, अकस्मात इंसान (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
3035.*पूर्णिका*
3035.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
फूल फूल और फूल
फूल फूल और फूल
SATPAL CHAUHAN
बोये बीज बबूल आम कहाँ से होय🙏🙏
बोये बीज बबूल आम कहाँ से होय🙏🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
मुझे तारे पसंद हैं
मुझे तारे पसंद हैं
ruby kumari
बंधन में रहेंगे तो संवर जायेंगे
बंधन में रहेंगे तो संवर जायेंगे
Dheerja Sharma
रमेशराज के मौसमविशेष के बालगीत
रमेशराज के मौसमविशेष के बालगीत
कवि रमेशराज
आपकी खुशी
आपकी खुशी
Dr fauzia Naseem shad
Loading...