Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Jan 2024 · 1 min read

प्यार समंदर

** प्यार समंदर
——————
मैं तो तुम को जी लूँ प्रेयसि,
काश ! कि तुम जीवन बन जाओ !
अगली पिछली सभी भुला दूँ ,
यदि तुम वर्तमान बन जाओ !!
*
वर्तमान को सुन्दर जी कर ,
सारा जीवन सहज गुजारा ;
ऐसा ही कुछ मंत्र फूँक दो-
या तुम स्वयं शंख बन जाओ !
*
स्पर्शों की अनुभूती से ,
जाने कितने लक्ष्य सधे हैं ;
वो क्षण सुखद सुखद कब होंगे –
जब मणि माला बन छू पाओ !
*
मैं भी बहुत-बहुत शर्मीला ,
खुल कर ना कुछ कह पाता हूँ;
डर रहता है कहीं कहीं तुम-
किसी और की ना हो जाओ !
*
कितने ही आशिक दुनियां में ,
करते रहे प्यार इकतरफा ;
कुछ तो दो संकेत प्यार का-
प्यार करो तो प्यार ही पाओ!
*
प्यार कभी ना लाभ-हानि है,
प्यार न गह्वर ना मचान है ;
प्यार समन्दर महज प्यार का –
पहले डूबो तब उतराओ !
————————————————-
C/R @ स्वरूप दिनकर
25/11/2023
————————————————–

83 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ramswaroop Dinkar
View all
You may also like:
आसान नहीं होता...
आसान नहीं होता...
Dr. Seema Varma
🥀 * गुरु चरणों की धूल*🥀
🥀 * गुरु चरणों की धूल*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
बहुत मशरूफ जमाना है
बहुत मशरूफ जमाना है
नूरफातिमा खातून नूरी
(23) कुछ नीति वचन
(23) कुछ नीति वचन
Kishore Nigam
यह जनता है ,सब जानती है
यह जनता है ,सब जानती है
Bodhisatva kastooriya
मां की कलम से!!!
मां की कलम से!!!
Seema gupta,Alwar
आ लौट के आजा टंट्या भील
आ लौट के आजा टंट्या भील
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
घर और घर की याद
घर और घर की याद
डॉ० रोहित कौशिक
एक खाली बर्तन,
एक खाली बर्तन,
नेताम आर सी
सविनय अभिनंदन करता हूॅं हिंदुस्तानी बेटी का
सविनय अभिनंदन करता हूॅं हिंदुस्तानी बेटी का
महेश चन्द्र त्रिपाठी
2585.पूर्णिका
2585.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
पागल तो मैं ही हूँ
पागल तो मैं ही हूँ
gurudeenverma198
*पुस्तक समीक्षा*
*पुस्तक समीक्षा*
Ravi Prakash
जिंदगी कुछ और है, हम समझे कुछ और ।
जिंदगी कुछ और है, हम समझे कुछ और ।
sushil sarna
कौन किसके सहारे कहाँ जीता है
कौन किसके सहारे कहाँ जीता है
VINOD CHAUHAN
* तुम न मिलती *
* तुम न मिलती *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
सम्यक योग की साधना दुरुस्त करे सब भोग,
सम्यक योग की साधना दुरुस्त करे सब भोग,
Mahender Singh
आजा माँ आजा
आजा माँ आजा
Basant Bhagawan Roy
🙅आज की भड़ास🙅
🙅आज की भड़ास🙅
*प्रणय प्रभात*
माईया गोहराऊँ
माईया गोहराऊँ
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
काव्य की आत्मा और सात्विक बुद्धि +रमेशराज
काव्य की आत्मा और सात्विक बुद्धि +रमेशराज
कवि रमेशराज
भरत
भरत
Sanjay ' शून्य'
जात आदमी के
जात आदमी के
AJAY AMITABH SUMAN
खुद से सिफारिश कर लेते हैं
खुद से सिफारिश कर लेते हैं
Smriti Singh
ढोलकों की थाप पर फगुहा सुनाई दे रहे।
ढोलकों की थाप पर फगुहा सुनाई दे रहे।
सत्य कुमार प्रेमी
सभी फैसले अपने नहीं होते,
सभी फैसले अपने नहीं होते,
शेखर सिंह
हम छि मिथिला के बासी
हम छि मिथिला के बासी
Ram Babu Mandal
हमारा संघर्ष
हमारा संघर्ष
पूर्वार्थ
सफर की यादें
सफर की यादें
Pratibha Pandey
ह्रदय की स्थिति की
ह्रदय की स्थिति की
Dr fauzia Naseem shad
Loading...