Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Jun 2023 · 1 min read

★बरसात की टपकती बूंद ★

पूछता है कमल इन बरसात की टपकती बूंदो से फिर क्या अपना वादा निभाओगी नहीं। जा रही हो छोड़कर क्या लौटकर आओगी नहीं।। ★IPS KAMAL THAKUR ★

350 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
ज़िन्दगी - दीपक नीलपदम्
ज़िन्दगी - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
पिता मेंरे प्राण
पिता मेंरे प्राण
Arti Bhadauria
चाहत
चाहत
Bodhisatva kastooriya
कुंडलिया छंद
कुंडलिया छंद
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
वक़्त का समय
वक़्त का समय
भरत कुमार सोलंकी
🙅बड़ा सच🙅
🙅बड़ा सच🙅
*प्रणय प्रभात*
ताउम्र करना पड़े पश्चाताप
ताउम्र करना पड़े पश्चाताप
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
श्याम दिलबर बना जब से
श्याम दिलबर बना जब से
Khaimsingh Saini
नवजात बहू (लघुकथा)
नवजात बहू (लघुकथा)
गुमनाम 'बाबा'
मौके पर धोखे मिल जाते ।
मौके पर धोखे मिल जाते ।
Rajesh vyas
* गीत मनभावन सुनाकर *
* गीत मनभावन सुनाकर *
surenderpal vaidya
*हथेली  पर  बन जान ना आए*
*हथेली पर बन जान ना आए*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
"आधी दुनिया"
Dr. Kishan tandon kranti
राख का ढेर।
राख का ढेर।
Taj Mohammad
तुम हमारा हो ख़्वाब लिख देंगे
तुम हमारा हो ख़्वाब लिख देंगे
Dr Archana Gupta
दिल का तुमसे सवाल
दिल का तुमसे सवाल
Dr fauzia Naseem shad
हम हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान है
हम हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान है
Pratibha Pandey
जिंदगी हमने जी कब,
जिंदगी हमने जी कब,
Umender kumar
रेत पर
रेत पर
Shweta Soni
श्रेष्ठ भावना
श्रेष्ठ भावना
Raju Gajbhiye
अभी भी बहुत समय पड़ा है,
अभी भी बहुत समय पड़ा है,
शेखर सिंह
बिन बुलाए कभी जो ना जाता कही
बिन बुलाए कभी जो ना जाता कही
कृष्णकांत गुर्जर
2744. *पूर्णिका*
2744. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*माटी कहे कुम्हार से*
*माटी कहे कुम्हार से*
Harminder Kaur
*जब शिव और शक्ति की कृपा हो जाती है तो जीव आत्मा को मुक्ति म
*जब शिव और शक्ति की कृपा हो जाती है तो जीव आत्मा को मुक्ति म
Shashi kala vyas
मोहब्बत
मोहब्बत
अखिलेश 'अखिल'
प्रकृति
प्रकृति
Sûrëkhâ
हम अपनों से न करें उम्मीद ,
हम अपनों से न करें उम्मीद ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
रात का आलम था और ख़ामोशियों की गूंज थी
रात का आलम था और ख़ामोशियों की गूंज थी
N.ksahu0007@writer
ग़ज़ल
ग़ज़ल
SURYA PRAKASH SHARMA
Loading...