Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Jun 2023 · 1 min read

पितृ दिवस पर….

पितृ दिवस के शुभ अवसर पर प्रिय पिता की स्मृतियों को समर्पित मेरे द्वारा रचित चंद दोहे…

दिनभर के व्यापार का, पिता रचे मजमून।
घर-भर की रौनक पिता, पिता बिना सब सून।।

काँधे पर अपने बिठा, खूब करायी सैर।
छोटी सी भी चोट पर, सदा मनायी खैर।।

तुम मुखिया परिवार के, रखते सबका ध्यान।
मिली तुम्हारे नाम से, हम सबको पहचान।।

सबका ही हित साधते, किया न कभी फरेब।
पिता तुम्हें हम पूजते, तुम देवों के देव।।

चिर स्मरणीय तात तुम, सदा रहोगे याद ।
मन से मन में गूँजता, मूक बधिर संवाद।।

किया नहीं संग्रह कभी, फैले कभी न हाथ।
किस्मत से ठाने रहे, नहीं झुकाया माथ।।

ज्ञाता थे कानून के, देते राय मुफीद।
उनके कौशल ज्ञान के, सब जन बने मुरीद।।

लालच कभी किया नहीं, सिद्ध किया न स्वार्थ।
राय सभी को मुफ्त दी, कर्म किए परमार्थ।।

भूले अपने शौक सब, हमें दिखाई राह।
पथ प्रशस्त सबका किया, देकर सही सलाह।।

धुर विरोधी भाग्य-कर्म, निभती कैसे प्रीत।
जिस पथ से भी तुम चले,भाग्य चला विपरीत।।

खुद्दारी ईमान सच, सहनशीलता न्याय।
गुँथे आप में इस तरह, हों जैसे पर्याय।।

आए कितने ताड़ने, धन-दौलत ले साथ।
सच से मुँह फेरा नहीं, सदा निभाया साथ।।

माँ पत्नी तनया बहन, दिया सभी को मान।
कोई तुमसे सीखता, नारी का सम्मान।।

सीखा तुमसे ही प्रथम, अनुशासन का अर्थ।
अभेद्य नहीं था कुछ तुम्हें, तुम थे सर्व समर्थ।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

Language: Hindi
2 Likes · 329 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from डॉ.सीमा अग्रवाल
View all
You may also like:
तुम्हारे महबूब के नाजुक ह्रदय की तड़पती नसों की कसम।
तुम्हारे महबूब के नाजुक ह्रदय की तड़पती नसों की कसम।
★ IPS KAMAL THAKUR ★
कभी-कभी ऐसा लगता है
कभी-कभी ऐसा लगता है
Suryakant Dwivedi
पिछले पन्ने भाग 2
पिछले पन्ने भाग 2
Paras Nath Jha
आज का महाभारत 2
आज का महाभारत 2
Dr. Pradeep Kumar Sharma
"" *आओ करें कृष्ण चेतना का विकास* ""
सुनीलानंद महंत
उसका आना
उसका आना
हिमांशु Kulshrestha
गुम लफ्ज़
गुम लफ्ज़
Akib Javed
चार लोग क्या कहेंगे?
चार लोग क्या कहेंगे?
करन ''केसरा''
क्युं बताने से हर्ज़ करते हो
क्युं बताने से हर्ज़ करते हो
Shweta Soni
*मेरे पापा*
*मेरे पापा*
Shashi kala vyas
हाइकु-गर्मी
हाइकु-गर्मी
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
#मुक्तक
#मुक्तक
*Author प्रणय प्रभात*
At the end of the day, you have two choices in love – one is
At the end of the day, you have two choices in love – one is
पूर्वार्थ
// प्रीत में //
// प्रीत में //
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
धर्म की खूंटी
धर्म की खूंटी
मनोज कर्ण
बेफिक्र तेरे पहलू पे उतर आया हूं मैं, अब तेरी मर्जी....
बेफिक्र तेरे पहलू पे उतर आया हूं मैं, अब तेरी मर्जी....
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
*घर में तो सोना भरा, मुझ पर गरीबी छा गई (हिंदी गजल)
*घर में तो सोना भरा, मुझ पर गरीबी छा गई (हिंदी गजल)
Ravi Prakash
Window Seat
Window Seat
R. H. SRIDEVI
ये राम कृष्ण की जमीं, ये बुद्ध का मेरा वतन।
ये राम कृष्ण की जमीं, ये बुद्ध का मेरा वतन।
सत्य कुमार प्रेमी
!! परदे हया के !!
!! परदे हया के !!
Chunnu Lal Gupta
वक्रतुंडा शुचि शुंदा सुहावना,
वक्रतुंडा शुचि शुंदा सुहावना,
Neelam Sharma
दूर जा चुका है वो फिर ख्वाबों में आता है
दूर जा चुका है वो फिर ख्वाबों में आता है
Surya Barman
3257.*पूर्णिका*
3257.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
नव प्रबुद्ध भारती
नव प्रबुद्ध भारती
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
हासिल नहीं है कुछ
हासिल नहीं है कुछ
Dr fauzia Naseem shad
संकल्प
संकल्प
Davina Amar Thakral
*कंचन काया की कब दावत होगी*
*कंचन काया की कब दावत होगी*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
"मुकाबिल"
Dr. Kishan tandon kranti
मासूमियत
मासूमियत
Surinder blackpen
माँ तेरे चरणों
माँ तेरे चरणों
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
Loading...