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25 Jul 2016 · 1 min read

पावस बहुत रुलाती हो

पावस बहुत रुलाती हो
तरसा तरसा कर आती हो

पीली चमड़ी वाली गर्मी
हो जाती जब बहुत अधर्मी
उमस से भीगा है आँचल
थमी हवा मन करे विकल

पावस हडकाओ सूरज को
रोके मद जो आग उगलता
कहे मेघदूतों से जाकर
करो शीघ्र गर्मी को चलता

इधर उधर बदल पागल से
बिना वस्त्र घूमें घायल से
रुण्ड-मुंड वृक्ष लतिकाएँ
खड़े निरीह से मुख लटकाए

खरी जल के बैरी बादल
बरसाओ ठंडा मीठा जल
तेरा आना टलता जितना
सूखे का भय पलता उतना

पावस बहुत रुलाती हो
तरसा तरसा कर आती हो

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Comment · 252 Views
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