Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 May 2022 · 2 min read

पापा जी

पापा जी
——————-

पापा जी आदर्श हमारे सचमुच जग से न्यारे थे।
ख़ूब दिलाते मौसम के फ़ल लगते हमको प्यारे थे।
रात समय नौ बजते सोना सुबह उठाते जल्दी से।
गाँव गली पगडण्डी सबसे परिचय रोज़ हमारे थे ।।

दातून नीम की स्वयं तोड़कर हमको भी चबवाते थे।
मिले फ़ायदे उसके कितने विधिवत रोज़ गिनाते थे ।
खेत किसानी घर कामों की कितनी ज़िम्मेदारी थी ।
ख़ुशी-ख़ुशी वह उनको करते कंधे नहीं झुकाते थे ।।

स्वर व्यंजन उच्चारण करना पापा हमें सिखाते थे।
रोज़ पहाड़े मौखिक दस तक हमको ख़ूब रटाते थे।
अक्षर ज्ञान हुआ जब पूरा उम्र बढ़ी जब थोड़ी तो ।
अक्षर-अक्षर जोड़-जोड़ कर शब्द ज्ञान करवाते थे।।

साथ – साथ हम दोनों भाई पैदल पढ़ने जाते थे।
कभी-कभी जब झगड़ा होता पापा से बतलाते थे।
कभी डांट तो कभी पिटाई शायद घटना होती थी।
ज्यादातर तो बड़े प्यार से पापा जी समझाते थे ।।

उचित समय में काम ज़रूरी पापा जी निबटाते थे।
शाम-सुबह जब पढ़ने बैठें संग में रोज़ पढ़ाते थे।
नैतिक शिक्षा विषय हमरा सबसे अच्छा होता था।
विषय नहीं व्यवहार हमारा पापा जी बनवाते थे ।।

गणित और विज्ञान विषय से रखते गहरे नाते थे।
विषय एक अंग्रेजी बस थी जिससे हम घबराते थे।
पापा जी ने दिया हौंसला याद मायने करवाई ।
अंग्रेजी यह प्यारी लगती जिससे आँख चुराते थे।।

घटनाओं के गहरे आशय, पापा जी समझाते थे।
बिना कहे वह व्यवहारों से,करके भी दिखलाते थे।
दूर तलक मैं देखूँ उतना, जो ख़ुद देख न पाएँ वे ।
ऐसी चाहत मन में रख कर,कंधों पर बिठालते थे।।

व्यवहारिक सच्चाई को भी पापा जी समझाते थे ।
ग़लत सही को जाँचो कैसे पापा यूँ बतलाते थे ।
कोई देखे सुने कोई ना और कहीं कुछ कह ना दे ।
तीन बात यह लागू जिसमें ग़लत उसे ठहराते थे ।।

राजतंत्र के मुखर विरोधी लोकतंत्र अनुयायी थे ।
समतामूलक सोंच किसी की करते आप बड़ाई थे ।
आडंबर के सदा विरोधी प्रकृति प्रेम संग नाता था ।
ऊँच-नीच या छुआछूत पर करते बहुत बुराई थे ।।

अन्यायी तो कायर होता हमको यही बताते थे।
अन्यायी से लड़ना हमको प्रतिदिन ख़ूब सिखाते थे।
बिना लड़े ही हारा हो फ़िर सम्मुख घुटने टेके हो ।
अन्यायों को सहन किया जो उस पर रोष दिखाते थे।।

चरण वंदना पापा जी की पुनि पुनि शीष नवाता हूँ।
पास नहीं वह आज हमारे फ़िर भी जीता जाता हूँ।
प्रखर समस्या चोला ओढ़े रोज़ सुबह जब आती है।
पापा जी की रीति नीति से विजय श्री को पाता हूँ।।

शब्द वाक्य की सीमा ऊपर सबके पापा होते हैं ।
जिनके पापा जीवित देखो नींद चैन वह सोते हैं ।
दूर समस्या खड़ी झांकती पापा जी ढँकते रहते ।
जिनके पापा आज नहीं हैं चुप-चुप छुप-छुप रोते हैं।।

-सत्येन्द्र पटेल’प्रखर’
फतेहपुर
उत्तर प्रदेश
212601

9 Likes · 4 Comments · 1568 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
View all
You may also like:
जब कभी मन हारकर के,या व्यथित हो टूट जाए
जब कभी मन हारकर के,या व्यथित हो टूट जाए
Yogini kajol Pathak
गुजरे हुए वक्त की स्याही से
गुजरे हुए वक्त की स्याही से
Karishma Shah
2- साँप जो आस्तीं में पलते हैं
2- साँप जो आस्तीं में पलते हैं
Ajay Kumar Vimal
" जब तुम्हें प्रेम हो जाएगा "
Aarti sirsat
सच तो हम और आप ,
सच तो हम और आप ,
Neeraj Agarwal
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
* मन कही *
* मन कही *
surenderpal vaidya
"मोमबत्ती"
Dr. Kishan tandon kranti
काला दिन
काला दिन
Shyam Sundar Subramanian
प्रदर्शन
प्रदर्शन
Sanjay ' शून्य'
राह भटके हुए राही को, सही राह, राहगीर ही बता सकता है, राही न
राह भटके हुए राही को, सही राह, राहगीर ही बता सकता है, राही न
जय लगन कुमार हैप्पी
भिनसार हो गया
भिनसार हो गया
Satish Srijan
दुखों से दोस्ती कर लो,
दुखों से दोस्ती कर लो,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
बरसात की झड़ी ।
बरसात की झड़ी ।
Buddha Prakash
जी रही हूँ
जी रही हूँ
Pratibha Pandey
भाग्य प्रबल हो जायेगा
भाग्य प्रबल हो जायेगा
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
नवगीत
नवगीत
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
2838.*पूर्णिका*
2838.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*मनायेंगे स्वतंत्रता दिवस*
*मनायेंगे स्वतंत्रता दिवस*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
जीवन चक्र
जीवन चक्र
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
ओ मां के जाये वीर मेरे...
ओ मां के जाये वीर मेरे...
Sunil Suman
चांदनी न मानती।
चांदनी न मानती।
Kuldeep mishra (KD)
One day you will realized that happiness was never about fin
One day you will realized that happiness was never about fin
पूर्वार्थ
घणो ललचावे मन थारो,मारी तितरड़ी(हाड़ौती भाषा)/राजस्थानी)
घणो ललचावे मन थारो,मारी तितरड़ी(हाड़ौती भाषा)/राजस्थानी)
gurudeenverma198
जिंदगी
जिंदगी
Madhavi Srivastava
मंज़र
मंज़र
अखिलेश 'अखिल'
दोहा पंचक. . . नारी
दोहा पंचक. . . नारी
sushil sarna
■
■ "शिक्षा" और "दीक्षा" का अंतर भी समझ लो महाप्रभुओं!!
*Author प्रणय प्रभात*
दोगलापन
दोगलापन
Mamta Singh Devaa
करनी का फल
करनी का फल
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Loading...