Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Jul 2023 · 1 min read

पहले प्रत्यक्ष को

पहले प्रत्यक्ष को
प्रमाण की आवश्यकता
नहीं होती थी, क्योंकि
तब ज़हन के पास भी
आंखें होती थीं।।

■प्रणय प्रभात■

1 Like · 213 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
3162.*पूर्णिका*
3162.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
आजकल बहुत से लोग ऐसे भी है
आजकल बहुत से लोग ऐसे भी है
Dr.Rashmi Mishra
*
*"वो भी क्या दिवाली थी"*
Shashi kala vyas
हमें ना शिकायत है आप सभी से,
हमें ना शिकायत है आप सभी से,
Dr. Man Mohan Krishna
अपने अपने कटघरे हैं
अपने अपने कटघरे हैं
Shivkumar Bilagrami
कृष्ण जन्म
कृष्ण जन्म
लक्ष्मी सिंह
कहती जो तू प्यार से
कहती जो तू प्यार से
The_dk_poetry
सबने सलाह दी यही मुॅंह बंद रखो तुम।
सबने सलाह दी यही मुॅंह बंद रखो तुम।
सत्य कुमार प्रेमी
चलते चलते थक गया, मन का एक फकीर।
चलते चलते थक गया, मन का एक फकीर।
Suryakant Dwivedi
जिन्दगी में फैंसले और फ़ासले सोच समझ कर कीजिएगा !!
जिन्दगी में फैंसले और फ़ासले सोच समझ कर कीजिएगा !!
Lokesh Sharma
माँ दुर्गा मुझे अपना सहारा दो
माँ दुर्गा मुझे अपना सहारा दो
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
अब कहाँ मौत से मैं डरता हूँ
अब कहाँ मौत से मैं डरता हूँ
प्रीतम श्रावस्तवी
"नंगे पाँव"
Pushpraj Anant
जीवन का कठिन चरण
जीवन का कठिन चरण
पूर्वार्थ
कहीं और हँसके खुशियों का इज़हार करते हैं ,अपनों से उखड़े रहकर
कहीं और हँसके खुशियों का इज़हार करते हैं ,अपनों से उखड़े रहकर
DrLakshman Jha Parimal
तो मेरा नाम नही//
तो मेरा नाम नही//
गुप्तरत्न
कौन कहता है ज़ज्बात के रंग होते नहीं
कौन कहता है ज़ज्बात के रंग होते नहीं
Shweta Soni
खूबसूरत, वो अहसास है,
खूबसूरत, वो अहसास है,
Dhriti Mishra
"सुन लो"
Dr. Kishan tandon kranti
धर्म अधर्म की बाते करते, पूरी मनवता को सतायेगा
धर्म अधर्म की बाते करते, पूरी मनवता को सतायेगा
Anil chobisa
परिवर्तन विकास बेशुमार🧭🛶🚀🚁
परिवर्तन विकास बेशुमार🧭🛶🚀🚁
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
तड़प कर मर रही हूं तुझे ही पाने के लिए
तड़प कर मर रही हूं तुझे ही पाने के लिए
Ram Krishan Rastogi
अधूरा नहीं हूँ मैं तेरे बिना
अधूरा नहीं हूँ मैं तेरे बिना
gurudeenverma198
दो अक्टूबर
दो अक्टूबर
नूरफातिमा खातून नूरी
सब्र रखो सच्च है क्या तुम जान जाओगे
सब्र रखो सच्च है क्या तुम जान जाओगे
VINOD CHAUHAN
गिलहरी
गिलहरी
Satish Srijan
कुछ बातें पुरानी
कुछ बातें पुरानी
PRATIK JANGID
जब मैं लिखता हूँ
जब मैं लिखता हूँ
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
🙅आज🙅
🙅आज🙅
*प्रणय प्रभात*
मैं नारी हूँ
मैं नारी हूँ
Sandhya Chaturvedi(काव्यसंध्या)
Loading...