Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 Feb 2023 · 1 min read

पहले की भारतीय सेना

सेना का रंग रूप बदल गया,
*********************
सेना का रंग रूप बदल गया,
बदल गया अब ढंग।

कहाँ गयी ओ सी की जोगा
कहाँ गयी वन टन।
कलफ की वर्दी,ऊंचा तुर्रा,
गर्व से भरता मन।
ओ जी निक्कर खाकी टॉवेल,
और मेस्टिन सरकारी।
कहाँ है वाइट मग्गा तश्तरी,
डालडा की सुहारी।
कहाँ चली गयी मिलिट्री बोगी।
कहाँ है फ्री वारंट।
शक्तिमान की धक धक धक धक,
और वह चौड़ा टेंट।

एस एम लीटर दारू पीता,
तब कुछ चढ़ता रंग।
सेना का रंग रूप बदल गया,
बदल गया अब ढंग।

कम्पनी बाबू का टाइप राइटर,
साइक्लोस्टाइल छापा खाना।
पे बुक और,एकाउंट्स रोल में,
लाइन से वेतन पाना।

याद करो वो भी क्या दिन थे,
सैनिक आता गांव।
लिए बेड होल्डर और एक बक्सा,
चलता लम्बे पाँव।
पूरा गाँव मगन हो कहता,
देखो आया फौजी।
सिंदूर बिंदिया लगा महावर,
खूब मुश्काएँ भौजी।
फौजी बातें सुन कर सारे,
लोग भूलते गम।
शाम को कुछ लोग बैठ संग,
पीते डीएफआर रम।

कभी कभी फौजी पी लेता,
घोटी मीठी भंग।
सेना का रंग रूप बदल गया,
बदल गया अब ढंग।

भारतीय सेना सदैव रहती,
जोश जुनून भरी।
देश में कैसी भी विपदा हो,
उतरी सदा खरी।
पहले तो थे साधन थोड़े,
तब फौजी गुर्राते थे।
जल थल महियल कहीं हो दुश्मन,
ढूंढ में मारे भागते थे।
आज सुसज्जित संसाधन से,
हैं घातक हथियार।
अगर पड़ोसी करे हिमाकत,
जान से देंगे मार।

होगें दांत खट्टे दुश्मन के,
यदि होगी कोई जंग।
सेना का रंग रूप बदल गया,
बदल गया अब ढंग।

सतीश सृजन

Language: Hindi
204 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Satish Srijan
View all
You may also like:
बैठा के पास पूंछ ले कोई हाल मेरा
बैठा के पास पूंछ ले कोई हाल मेरा
शिव प्रताप लोधी
🌷🙏जय श्री राधे कृष्णा🙏🌷
🌷🙏जय श्री राधे कृष्णा🙏🌷
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
चार दिनों की जिंदगी है, यूँ हीं गुज़र के रह जानी है...!!
चार दिनों की जिंदगी है, यूँ हीं गुज़र के रह जानी है...!!
Ravi Betulwala
“गणतंत्र दिवस”
“गणतंत्र दिवस”
पंकज कुमार कर्ण
कितनी ही दफा मुस्कुराओ
कितनी ही दफा मुस्कुराओ
सिद्धार्थ गोरखपुरी
*भादो श्री कृष्णाष्टमी ,उदय कृष्ण अवतार (कुंडलिया)*
*भादो श्री कृष्णाष्टमी ,उदय कृष्ण अवतार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
कैसे देखनी है...?!
कैसे देखनी है...?!
Srishty Bansal
आंखन तिमिर बढ़ा,
आंखन तिमिर बढ़ा,
Mahender Singh
खुल के सच को अगर कहा जाए
खुल के सच को अगर कहा जाए
Dr fauzia Naseem shad
खिड़कियाँ -- कुछ खुलीं हैं अब भी - कुछ बरसों से बंद हैं
खिड़कियाँ -- कुछ खुलीं हैं अब भी - कुछ बरसों से बंद हैं
Atul "Krishn"
क़ैद कर लीं हैं क्यों साँसे ख़ुद की 'नीलम'
क़ैद कर लीं हैं क्यों साँसे ख़ुद की 'नीलम'
Neelam Sharma
*अजीब आदमी*
*अजीब आदमी*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
माँ
माँ
Dr Archana Gupta
I am always in search of the
I am always in search of the "why",
Manisha Manjari
पगली
पगली
Kanchan Khanna
मुकद्दर से ज्यादा
मुकद्दर से ज्यादा
rajesh Purohit
चाह नहीं मुझे , बनकर मैं नेता - व्यंग्य
चाह नहीं मुझे , बनकर मैं नेता - व्यंग्य
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
हीरक जयंती 
हीरक जयंती 
Punam Pande
"" *अहसास तेरा* ""
सुनीलानंद महंत
* पत्ते झड़ते जा रहे *
* पत्ते झड़ते जा रहे *
surenderpal vaidya
वसुधा में होगी जब हरियाली।
वसुधा में होगी जब हरियाली।
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
बड़ा हिज्र -हिज्र करता है तू ,
बड़ा हिज्र -हिज्र करता है तू ,
Rohit yadav
■ मेरे विचार से...
■ मेरे विचार से...
*प्रणय प्रभात*
सच्चे रिश्ते वही होते है जहा  साथ खड़े रहने का
सच्चे रिश्ते वही होते है जहा साथ खड़े रहने का
पूर्वार्थ
जाने वाले बस कदमों के निशाँ छोड़ जाते हैं
जाने वाले बस कदमों के निशाँ छोड़ जाते हैं
VINOD CHAUHAN
रखो अपेक्षा ये सदा,  लक्ष्य पूर्ण हो जाय
रखो अपेक्षा ये सदा, लक्ष्य पूर्ण हो जाय
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
तप रही जमीन और
तप रही जमीन और
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
"रचो ऐसा इतिहास"
Dr. Kishan tandon kranti
सौदागर हूँ
सौदागर हूँ
Satish Srijan
तुझे देखने को करता है मन
तुझे देखने को करता है मन
Rituraj shivem verma
Loading...