Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Nov 2023 · 1 min read

परो को खोल उड़ने को कहा था तुमसे

परो को खोल उड़ने को कहा था तुमसे
तुम नकली दुनिया की चकाचौंध में खुद को खो बैठी
सोचो क्या करोगी जब तुम्हारे पास सब होगा
वो सब जिसकी अंधी दौड़ में तुम अंधी हुए जा रही हो
पर तुम्हारा वो घर कैसा होगा जिसमें बाप नाम की कोई छत न होगी
कैसी होगी वो रसोई जिसमें माँ की जगह काम वाली बाई होगी
न तुम्हारी कोई सहेली होगी न तंग करने के लिए तुम्हारे भाई
किसको सुनायोगी तब अपनी कामयाबी की कहानी किस्से
तब सिर्फ तुम्हारे पास होंगे हीरो मोतियों के हार और लाखो पैसे
सुनो अब भी समय है अपनी जमीं को कसकर पकड़ लो
और उड़ जाओ इस खुले आसमान में
जो जमीन को छोड़ दोगी आसमान तुम्हें
औंधे मुंह पटक देगा तब तुम कहीं कि नही रहोगी
तुम अमीर अपनी जमीर से होगी
इस जमीं से होगी आसमां से होगी
बेशक तुम्हें लगेगा मैं कड़वी बाते कहती हूँ
पर याद रखना मैं मीठे जहर सा नही चढ़ती हुँ।।

1 Like · 267 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
* उपहार *
* उपहार *
surenderpal vaidya
तुम्हारी जाति ही है दोस्त / VIHAG VAIBHAV
तुम्हारी जाति ही है दोस्त / VIHAG VAIBHAV
Dr MusafiR BaithA
बाट का बटोही ?
बाट का बटोही ?
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
रोटी की क़ीमत!
रोटी की क़ीमत!
कविता झा ‘गीत’
ऐ ज़ालिम....!
ऐ ज़ालिम....!
Srishty Bansal
फिर कभी तुमको बुलाऊं
फिर कभी तुमको बुलाऊं
Shivkumar Bilagrami
■ सब परिवर्तनशील हैं। संगी-साथी भी।।
■ सब परिवर्तनशील हैं। संगी-साथी भी।।
*प्रणय प्रभात*
जब मां भारत के सड़कों पर निकलता हूं और उस पर जो हमे भयानक गड
जब मां भारत के सड़कों पर निकलता हूं और उस पर जो हमे भयानक गड
Rj Anand Prajapati
"तिलचट्टा"
Dr. Kishan tandon kranti
कौन किसके सहारे कहाँ जीता है
कौन किसके सहारे कहाँ जीता है
VINOD CHAUHAN
आदमी और मच्छर
आदमी और मच्छर
Kanchan Khanna
वादे खिलाफी भी कर,
वादे खिलाफी भी कर,
Mahender Singh
माॅं की कशमकश
माॅं की कशमकश
Harminder Kaur
यह उँचे लोगो की महफ़िल हैं ।
यह उँचे लोगो की महफ़िल हैं ।
Ashwini sharma
*अमूल्य निधि का मूल्य (हास्य व्यंग्य)*
*अमूल्य निधि का मूल्य (हास्य व्यंग्य)*
Ravi Prakash
प्रेम ही जीवन है।
प्रेम ही जीवन है।
Acharya Rama Nand Mandal
दु:ख का रोना मत रोना कभी किसी के सामने क्योंकि लोग अफसोस नही
दु:ख का रोना मत रोना कभी किसी के सामने क्योंकि लोग अफसोस नही
Ranjeet kumar patre
चकोर हूं मैं कभी चांद से मिला भी नहीं
चकोर हूं मैं कभी चांद से मिला भी नहीं
सत्य कुमार प्रेमी
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
लालच
लालच
Vandna thakur
नौकरी न मिलने पर अपने आप को अयोग्य वह समझते हैं जिनके अंदर ख
नौकरी न मिलने पर अपने आप को अयोग्य वह समझते हैं जिनके अंदर ख
Gouri tiwari
नहीं आती कुछ भी समझ में तेरी कहानी जिंदगी
नहीं आती कुछ भी समझ में तेरी कहानी जिंदगी
gurudeenverma198
सजल...छंद शैलजा
सजल...छंद शैलजा
डॉ.सीमा अग्रवाल
गरीबी
गरीबी
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
*अवध  में  प्रभु  राम  पधारें है*
*अवध में प्रभु राम पधारें है*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
"एक ही जीवन में
पूर्वार्थ
2325.पूर्णिका
2325.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
ब्राह्मण
ब्राह्मण
Sanjay ' शून्य'
मुक्तक
मुक्तक
Neelofar Khan
पता ना था के दीवान पे दर्ज़ - जज़बातों  के नाम भी होते हैं 
पता ना था के दीवान पे दर्ज़ - जज़बातों  के नाम भी होते हैं 
Atul "Krishn"
Loading...