Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Feb 2024 · 1 min read

*”परछाई”*

परछाई
खुद की परछाई देख ये प्रश्न उमड़ आया ,
क्यों कभी उजली तन कभी श्यामल काया।
कुंठित मन दुखी हो श्याम वर्ण सी काया,
मन प्रसन्न हो तब निखरी उजली सुंदर काया।

खुद की परछाई देख जब ये मन भरमाया ,
कभी अच्छी तो कभी बुरी नजरों की साया।
पलकें बंद सुंदर नयन नक्श देख क्यों इठलाया,
उजली तन बदन शांत नीरस श्यामल सी काया।

अंतर्मन से ढूंढ लिया जब निर्मल मन की काया ,
रूप निखर कर सामने साक्षी भाव जब आया।
उम्र के पड़ाव में थक चुकी जब धूमिल काया,
उजला तन मन पलकों में शुभ्र रंग की छाया।

परछाई देख जब नारी के मन को उकसाया,
दर्पण देख असली चेहरा सामने उभर आया।
शुद्ध साक्षी भाव से उजली सुंदर रूप माया,
काले गोरे का भाव पूर्ण समझ में आया।
असली चेहरा सामने साक्षी भाव से ,
उजली तन सुंदर काया,
नकली चेहरा पीछे अंतर्मन से,
श्यामल रूप दिखलाया।
शशिकला व्यास शिल्पी✍️

Language: Hindi
1 Like · 93 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जब दिल ही उससे जा लगा..!
जब दिल ही उससे जा लगा..!
SPK Sachin Lodhi
लिखने – पढ़ने का उद्देश्य/ musafir baitha
लिखने – पढ़ने का उद्देश्य/ musafir baitha
Dr MusafiR BaithA
लाभ की इच्छा से ही लोभ का जन्म होता है।
लाभ की इच्छा से ही लोभ का जन्म होता है।
Rj Anand Prajapati
सार छंद विधान सउदाहरण / (छन्न पकैया )
सार छंद विधान सउदाहरण / (छन्न पकैया )
Subhash Singhai
होली है ....
होली है ....
Kshma Urmila
पृथ्वीराज
पृथ्वीराज
Sandeep Pande
क्रोध
क्रोध
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
🙅चुनावी साल🙅
🙅चुनावी साल🙅
*Author प्रणय प्रभात*
💐अज्ञात के प्रति-151💐
💐अज्ञात के प्रति-151💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
सोचता हूँ के एक ही ख्वाईश
सोचता हूँ के एक ही ख्वाईश
'अशांत' शेखर
कुछ मुक्तक...
कुछ मुक्तक...
डॉ.सीमा अग्रवाल
क्यों दोष देते हो
क्यों दोष देते हो
Suryakant Dwivedi
@ खोज @
@ खोज @
Prashant Tiwari
छोटी- छोटी प्रस्तुतियों को भी लोग पढ़ते नहीं हैं, फिर फेसबूक
छोटी- छोटी प्रस्तुतियों को भी लोग पढ़ते नहीं हैं, फिर फेसबूक
DrLakshman Jha Parimal
माँ काली
माँ काली
Sidhartha Mishra
*भरोसा तुम ही पर मालिक, तुम्हारे ही सहारे हों (मुक्तक)*
*भरोसा तुम ही पर मालिक, तुम्हारे ही सहारे हों (मुक्तक)*
Ravi Prakash
शायरी
शायरी
Jayvind Singh Ngariya Ji Datia MP 475661
शीत की शब में .....
शीत की शब में .....
sushil sarna
मैं  गुल  बना  गुलशन  बना  गुलफाम   बना
मैं गुल बना गुलशन बना गुलफाम बना
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
प्रेम अपाहिज ठगा ठगा सा, कली भरोसे की कुम्हलाईं।
प्रेम अपाहिज ठगा ठगा सा, कली भरोसे की कुम्हलाईं।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
वह एक हीं फूल है
वह एक हीं फूल है
Shweta Soni
मुसाफिर हो तुम भी
मुसाफिर हो तुम भी
Satish Srijan
बाबा महादेव को पूरे अन्तःकरण से समर्पित ---
बाबा महादेव को पूरे अन्तःकरण से समर्पित ---
सिद्धार्थ गोरखपुरी
देखा है।
देखा है।
Shriyansh Gupta
3085.*पूर्णिका*
3085.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
🌼एकांत🌼
🌼एकांत🌼
ruby kumari
कभी शांत कभी नटखट
कभी शांत कभी नटखट
Neelam Sharma
जरूरत से ज्यादा
जरूरत से ज्यादा
Ragini Kumari
फूल और तुम
फूल और तुम
Sidhant Sharma
मेरी आँखों से भी नींदों का रिश्ता टूट जाता है
मेरी आँखों से भी नींदों का रिश्ता टूट जाता है
Aadarsh Dubey
Loading...