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20 Jul 2023 · 1 min read

न ठंड ठिठुरन, खेत न झबरा,

न ठंड ठिठुरन, खेत न झबरा,
न फसल न कंबल, कैसी पूस की रात है। वो जानवरों का चरना, झबरा का भौंकना, वाह प्रेमचंद जी आपकी क्या बात ।।

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