Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Feb 2023 · 5 min read

निज धृत

विश्वेश्वर सिंह राजा शार्दूल विक्रम सिंह एक मात्र सपूत पढ़ने लिखने में होशियार गम्भीर सूझ बूझ का व्यक्तित्व भविष्य एव वर्तमान दोनो के लिए राजा शार्दुल विक्रम सिंह के अरमानों कि औलाद विश्वेश्वर सिंह थे ।

काव्या कि परिवरिश एव शार्दुल सिंह कि नेक नियति की छाया थे विश्वेश्वर सिंह, विशेश्वर सिंह कि शिक्षा दीक्षा की सबसे उत्तम व्यवस्था कर रखी थी कोई कोर कसर नही उठा रखी थी विश्वेश्वर सिंह जी ने भी पिता की आकांक्षाओ के लिए परिश्रम करने में कोई कोर कसर नही उठा रखी थी ।

मैट्रिक टॉप इंटरमीडिएट टाप और इंटरमीडिएट के साथ ही मेडिकल कालेज में दाखिला वह भी देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान एम्स में विश्वेश्वर सिंह ने अपने पिता के आकांक्षाओ एव के लिए जीवन के प्रत्येक पल का सदुपयोग किया था और अपने पिता शार्दुल सिंह का मान बढ़ा रहे थे ।

जो भी विशेश्वर सिंह को देखता यही कहता लायक बाप का शरीफ बेटा और यही कहता कि अमूमन राजा शार्दुल जैसा सम्पन्न सुलझा पिता एव उसकी शान औलाद विश्वेश्वर सिंह बेटा पितृ कि जोडी विरले ही मिलती है ।

विशेश्वर सिंह जब मेडिकल कॉलेज प्रथम वर्ष में थे तभी उनकी मुलाकात मनीषा जिंदल से हुई वह भी बड़े व्यवसायी करम चंद जिंदल की इकलौती बेटी थी बेहद खूबसूरत और आकर्षक प्रभवी व्यक्तित्व जो किसी को भी प्रभावित कर सकता था मगर विश्वेश्वर गम्भीर, दृढ़ ,दूरदर्शी व्यतित्व का धनी थी।
उसके ऊपर सिर्फ अपने उद्देश्य का जुनून सवार था बाकी कुछ भी नही मनीषा जिंदल से उसकी जान पहचान थी ऐसा विश्वेश्वर समझते सिर्फ मनीषा समझती थी कि विश्वेश्वर उससे प्यार करता है दोनों बिंदास एक दूसरे के साथ घूमते फिरते और अध्ययन सम्बंधित विषयो पर आपस कि जानकारियों को साझा करते सभी सहपाठी यही समझते कि मनीषा विश्वेश्वर एक दूसरे से प्यार करते है ।

कॉलेज के सभी कार्यक्रमो में दोनों आगे बढ़ कर सहभागिता करते थे कॉलेज के प्रोफेसर्स भी मनीषा और विश्वेश्वर कि जोड़ी को यही मानते की दोनों भविष्य के नामचीन डॉक्टर दम्पति में शुमार होकर कॉलेज का नाम रौशन करेंगे ।

मनीषा का जन्म दिन था वह अपने घर उदयपुर विश्वेश्वर सिंह को ले गयी मनीषा के डैडी करम चंद जिंदल बोले तो के सी जिंदल एव माँ विनीता जिंदल विश्वेश्वर को बहुत पसंद करते उन्हें इस बात का इत्मीनान था कि बेटी मनीषा ने उनकी इच्छाओं के अनुरूप ही विश्वेश्वर को चुना है।

वे भी ऐसे ही लड़के की तलाश करते मनीषा के लिए यदि उन्हें मनीषा के लिए वर तलाश करना होता यही कारण था कि उन्होंने मनीषा को विश्वेश्वर को साथ लाने के लिए कहा था और मनीषा के जन्म दिन पर बहुत बड़ी पार्टी का आयोजन किया था ।

जन्म दिन की पार्टी शुरू हुई के सी जिंदल शहर एव प्रदेश के बहुत बड़े एव प्रतिष्टित व्यवसायी ही नही बल्कि रसूख वाले व्यक्तित्व थे उनकी अपनी कई मिले थी जिसमे मनीषा जन्म के साथ शेयर धारक थी लेकिन मनीषा को भाईयों की तरह पिता के नक्शे कदम पर उद्योग पति बनने की कोई इच्छा नही थी ।

उंसे तो अपनी मेहनत प्रतिभा कि पहचान कि तलाश थी जिसके लिए वह दिन रात मेहनत कर रही थी ।

मनीषा के जन्म दिन कि खास पार्टी में शहर ही नही प्रदेश एव देश विदेश से लोग आए थे जन्म दिन कि पार्टी में विनीता एव के सी जिंदल ने एका एक पार्टी के शुरुर में सबका ध्यान आकृष्ट करते हुए बोली देवियों एवं सज्जनों आज मनीषा हमारे परिवार कि लाड़ली बेटी पूरा परिवार उसकी हर खुशियो के लिए सभी सम्भव प्रायास करता है मेरी प्यारी मनीषा ने अपनी खुशियो के लिए एक ऐसे जीवन साथी की तलाश कर लिया है जो जिंदल परिवार की सोच एव मनीषा के लिए उपयुक्तता का सत्यार्थ है ।

आज पूरा जिंदल परिवार मनीषा के भाई एव अन्य सभी रिश्ते जो इस जन्म दिन कि पार्टी में उपस्थित है मनीषा की पसंद कि दाद देते हुए उसे मनीषा के जीवन साथी के रूप में स्वीकार करते है आप सभी जानाना चाहेंगे वह खुशनशीब कौन है ?

तो दिल धाम लीजिये जनाब वह खाशियत कि खान हमारा अभिमान और मनीषा कि जिंदगी जान है विश्वेश्वर सिंह पूरा हाल तालियों कोई गड़गड़ाहट से गूंज उठा और सभी विश्वेश्वर एव मनीषा को बधाई देने लगे।

विश्ववेशर की समझ मे यह नही आ रहा था कि वह क्या करे ?उसने मौके की नजाकत को भांप कर चुप रहना ही बेहतर समझा और सबकी बधाईयों का मुस्कुराते हुए स्वीकार करते हुए जबाब देता जा रहा था रात को तीन बजे तक पार्टी चली और सुबह देर तक सभी सोते रहे
के सी जिंदल एव विनीता जिंदल ने स्वंय जाकर विश्ववेशर को उठाया और बोले गुड मॉर्निंग बेटे उठो तुम अब हमारे परिवार के महत्वपूर्ण हिस्सा हो विश्ववेशर उठा और नहा धो कर नाश्ता करने के उपरांत बोला कि अंकल अब मुझे जाने की इज़ाजत दे जिंदल दंपति एक साथ बोल उठा नही बेटे तुम तो सभी मेहमानों के जाने के बाद मनीषा के साथ ही दिल्ली के लिए रवाना होंगे तब तक तुम और मनीष राजस्थान के दार्शनिक एव टूरिस्ट् स्पॉट का भ्रमण करने जाओगे तुम लोगो के जाने का बंदोबस्त हो चुका है।

विश्ववेशर कुछ भी नही बोल सका और चलने को तैयार हो गया मनीषा भी तैयार होकर विश्वेश्वर के साथ चल पड़ी सप्ताह भर राजस्थान के बिभन्न ऐतिहासिक एव दर्शनीय स्थानों का भ्रमण करने के बाद लौट कर आये तब तक सारे मेहमान जा चुके थे एक दिन रुकने के बाद दोनों दिल्ली लौट आये।

दिल्ली लौटने के बाद विश्ववेशर गुम सुम रहने लगा एव उसने मनीषा से मिलना ही बंद कर दिया जब दो दिन तक कॉलेज केम्पस में मनीषा की मुलाकात विश्ववेशर से नही हुये तब वह स्वंय लाइब्रेरी में गयी जहाँ विश्वेश्वर अपने अध्ययन में व्यस्त था और जबरन हाथ पकड़ कर बाहर एकांत जगह ले गयी और क्रोधित शेरनी की तरह बोली क्या हुआ तुम्हे दो दिन लौटे हो गया और तुम्हारी हमारी मुलाकात तक नही हुये पिछले पांच वर्षों में कभी ऐसा नही हुआ? क्या समझ रखा है जनाब ने? किसी की भावनाओ का कद्र करना नही सीखा है क्या?क्या गुनाह है मेरा ?यही न कि मैंने तुमसे प्यार किया है? क्या मैं तुम्हारे कल्पनाओं के अनुरूप नही हूँ ?विश्वेश्वर सिर्फ इतना ही बोल सका कि नही मनीषा मैंने कभी आपको प्यार के पैमाने पर नही रखा ना ही देखा मनीषा बोली अब देख लो ना कौन सी उमर गुजर गई है और जो जो मासूम मनिषा के मन मे आया #जली कटी सुनाया# विधेश्वर के पास सिर्फ #मनीषा के जली कटी सुनने #के अलावा कोई रास्ता ही नही रहा मनीषा ने अपने भावुक एव मासूम अंदाज़ में कहा जनाब मैंने प्यार किया है कोई मज़ाक या खेल नही आपको जीवन भर रहना मेरे साथ ही होगा चाहे जितना चाहे सर पटक लीजिये आपके पास किसी तरह कि कमी निकाल सकने का हक है यदि निकाल सकते है तो निकाल कर मुझे बाहर कर सकते है और खरी खोटी जली कटी सुनाते हुए चली गयी विश्वेश्वर को बहुत अच्छी तरह अंदाज़ था कि मनीषा साधरण नही असाधरण प्रतिभासम्पन्न एव अभिजात्य समाज कि आधुनिक लड़की है जो ठान लेगी वह अवश्य पूरा करेगी अतः वह गम्भीरता से उसके अगले कदम की प्रतीक्षा करने लगा।
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

Language: Hindi
144 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
View all
You may also like:
मैं कीड़ा राजनीतिक
मैं कीड़ा राजनीतिक
Neeraj Mishra " नीर "
आप से दर्दे जुबानी क्या कहें।
आप से दर्दे जुबानी क्या कहें।
सत्य कुमार प्रेमी
अगर आप अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर देते हैं,तो आप सम्पन्न है
अगर आप अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर देते हैं,तो आप सम्पन्न है
Paras Nath Jha
"इंसान की जमीर"
Dr. Kishan tandon kranti
New Love
New Love
Vedha Singh
इंसानों की क़ीमत को
इंसानों की क़ीमत को
Sonam Puneet Dubey
2327.पूर्णिका
2327.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
इल्म
इल्म
Bodhisatva kastooriya
जब तक बांकी मेरे हृदय की एक भी सांस है।
जब तक बांकी मेरे हृदय की एक भी सांस है।
Rj Anand Prajapati
मेरी कलम से…
मेरी कलम से…
Anand Kumar
वक्त को वक्त समझने में इतना वक्त ना लगा देना ,
वक्त को वक्त समझने में इतना वक्त ना लगा देना ,
ज्योति
*पुस्तक समीक्षा*
*पुस्तक समीक्षा*
Ravi Prakash
खुद को तलाशना और तराशना
खुद को तलाशना और तराशना
Manoj Mahato
*अहं ब्रह्म अस्मि*
*अहं ब्रह्म अस्मि*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
अंत में पैसा केवल
अंत में पैसा केवल
Aarti sirsat
कल आज और कल
कल आज और कल
Omee Bhargava
नता गोता
नता गोता
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
घृणा आंदोलन बन सकती है, तो प्रेम क्यों नहीं?
घृणा आंदोलन बन सकती है, तो प्रेम क्यों नहीं?
Dr MusafiR BaithA
हौसला कभी टूटने नहीं देना , फ़तह  हौसलों से होती है , तलवारो
हौसला कभी टूटने नहीं देना , फ़तह हौसलों से होती है , तलवारो
Neelofar Khan
ये जो आँखों का पानी है बड़ा खानदानी है
ये जो आँखों का पानी है बड़ा खानदानी है
कवि दीपक बवेजा
नारी पुरुष
नारी पुरुष
Neeraj Agarwal
चांदनी रातों में
चांदनी रातों में
Surinder blackpen
रेत का ज़र्रा मैं, यूं ही पड़ा था साहिल पर,
रेत का ज़र्रा मैं, यूं ही पड़ा था साहिल पर,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
🌹जादू उसकी नजरों का🌹
🌹जादू उसकी नजरों का🌹
SPK Sachin Lodhi
प्रेम और पुष्प, होता है सो होता है, जिस तरह पुष्प को जहां भी
प्रेम और पुष्प, होता है सो होता है, जिस तरह पुष्प को जहां भी
Sanjay ' शून्य'
हर पन्ना  जिन्दगी का
हर पन्ना जिन्दगी का
हिमांशु Kulshrestha
(हमसफरी की तफरी)
(हमसफरी की तफरी)
Sangeeta Beniwal
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
खुद के वजूद की
खुद के वजूद की
Dr fauzia Naseem shad
नींबू की चाह
नींबू की चाह
Ram Krishan Rastogi
Loading...