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12 May 2022 · 1 min read

धुँध

धुँध

धुँध पड़ गयी रिश्तों में
रंजिशों को पकड़े है
लाख जतन कर छूटे ना
शक का कोहरा जकड़े है

धुंधला गई तनहा यादें
मलालों का कुहासा है
तल्खियों के मौसम में
इश्क़ धुआँ धुआँ सा है

पग पग आगे जो बढ़ो
कोहरा छँटता जाएगा
धूप का एक नन्हा टुकड़ा
आख़िर में मिल जाएगा

कह रही कुछ धड़कने
एक बार सुनो तो सही
मिल जाएगी मंज़िलें
तुम थोड़ा चलो तो सही

रेखांकन।रेखा

Language: Hindi
1 Like · 1 Comment · 337 Views
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