Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 May 2024 · 1 min read

धाम- धाम में ईश का,

धाम- धाम में ईश का,
खूब लगाया ध्यान ।
दान -दक्षिणा से लुटे,
पर न मिला भगवान ।।

सुशील सरना / 21-5-24

31 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
व्यंग्य कविता-
व्यंग्य कविता- "गणतंत्र समारोह।" आनंद शर्मा
Anand Sharma
जिंदगी सभी के लिए एक खुली रंगीन किताब है
जिंदगी सभी के लिए एक खुली रंगीन किताब है
Rituraj shivem verma
नौकरी (१)
नौकरी (१)
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
काश वो होते मेरे अंगना में
काश वो होते मेरे अंगना में
मनमोहन लाल गुप्ता 'अंजुम'
कुंडलिया . . .
कुंडलिया . . .
sushil sarna
*मायावी मारा गया, रावण प्रभु के हाथ (कुछ दोहे)*
*मायावी मारा गया, रावण प्रभु के हाथ (कुछ दोहे)*
Ravi Prakash
कविता
कविता
Rambali Mishra
वर्तमान के युवा शिक्षा में उतनी रुचि नहीं ले रहे जितनी वो री
वर्तमान के युवा शिक्षा में उतनी रुचि नहीं ले रहे जितनी वो री
Rj Anand Prajapati
एक ऐसा दोस्त
एक ऐसा दोस्त
Vandna Thakur
*जमीं भी झूमने लगीं है*
*जमीं भी झूमने लगीं है*
Krishna Manshi
मेरी कलम से…
मेरी कलम से…
Anand Kumar
साड़ी हर नारी की शोभा
साड़ी हर नारी की शोभा
ओनिका सेतिया 'अनु '
23/36.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/36.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जनता की कमाई गाढी
जनता की कमाई गाढी
Bodhisatva kastooriya
इस नयी फसल में, कैसी कोपलें ये आयीं है।
इस नयी फसल में, कैसी कोपलें ये आयीं है।
Manisha Manjari
"चक्रव्यूह"
Dr. Kishan tandon kranti
क्या पता है तुम्हें
क्या पता है तुम्हें
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
हार हमने नहीं मानी है
हार हमने नहीं मानी है
संजय कुमार संजू
दिल है के खो गया है उदासियों के मौसम में.....कहीं
दिल है के खो गया है उदासियों के मौसम में.....कहीं
shabina. Naaz
खुद से प्यार
खुद से प्यार
लक्ष्मी सिंह
* शक्ति स्वरूपा *
* शक्ति स्वरूपा *
surenderpal vaidya
अपनों के अपनेपन का अहसास
अपनों के अपनेपन का अहसास
Harminder Kaur
ये अलग बात है
ये अलग बात है
हिमांशु Kulshrestha
एक तरफ़ा मोहब्बत
एक तरफ़ा मोहब्बत
Madhuyanka Raj
**पी कर  मय महका कोरा मन***
**पी कर मय महका कोरा मन***
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
मेहनत
मेहनत
Dr. Pradeep Kumar Sharma
इंसान समाज में रहता है चाहे कितना ही दुनिया कह ले की तुलना न
इंसान समाज में रहता है चाहे कितना ही दुनिया कह ले की तुलना न
पूर्वार्थ
दुश्मनों से नहीं दोस्तों से ख़तरा है
दुश्मनों से नहीं दोस्तों से ख़तरा है
Manoj Mahato
जिंदगी मौत से बत्तर भी गुज़री मैंने ।
जिंदगी मौत से बत्तर भी गुज़री मैंने ।
Phool gufran
छोटी- छोटी प्रस्तुतियों को भी लोग पढ़ते नहीं हैं, फिर फेसबूक
छोटी- छोटी प्रस्तुतियों को भी लोग पढ़ते नहीं हैं, फिर फेसबूक
DrLakshman Jha Parimal
Loading...