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19 Nov 2023 · 1 min read

दोहा मुक्तक

संकेतों के हो गए, जब पूरे दस्तूर ।
लाज लजीली हो गई, बांहों में मजबूर ।
साँसों की सरगोशियाँ, तन्हाई का शोर –
दौर समर्पण का चला, मद में तन थे चूर ।

सुशील सरना / 19-11-24

1 Like · 143 Views
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