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5 Feb 2024 · 1 min read

दोहा त्रयी. . .

दोहा त्रयी. . .

कल तो कल का काल है, काल बड़ा विकराल ।
काल गर्भ में है छुपा, इच्छाओं का जाल ।।

कल में छल का वास है, कल में जीवित प्यास ।
कल में जीती जिंदगी, श्वांस – श्वांस मधुमास ।।

वर्तमान का अंश था, बीते कल का काल ।
भावी कल के काल की , समझ न आये चाल ।।

सुशील सरना / 5-2-24

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