Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Aug 2016 · 1 min read

देख कर फिर सघन जलधर

देखकर फिर सघन जलधर
विकल बरसे नयन झर-झृर
सूखते से पादपों ने
मौन रहकर सब सहा है
अधखिली कलियों प्रतिपल
आस भर-भर कर कहा है
खिल उठे फिर प्रेम-मधुबन
अश्रु बरसो आज निर्झर । देखकर….
वेदना के गीत की यह
मधुर धुन किसने सुनाई ?
चाह की परिकल्पना में
मूर्ति मञ्जुल क्यों बनाई ?
क्यों किया श्रंगार अनुपम
कामना ने रूप धर-धर ?देखकर …
हम चले थे नभ से लेकर
मन में सुन्दर सप्त-घेरे
दिन सुखद अब रात में हैं
खो गये वह पंथ मेरे
प्रेम-दीपक आज जलना
साथ मेरे आह भर-भर
देखकर फिर सघन जलधर, विकल ….

Language: Hindi
1 Comment · 514 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
इंकलाब की मशाल
इंकलाब की मशाल
Shekhar Chandra Mitra
जब आपका ध्यान अपने लक्ष्य से हट जाता है,तब नहीं चाहते हुए भी
जब आपका ध्यान अपने लक्ष्य से हट जाता है,तब नहीं चाहते हुए भी
Paras Nath Jha
मोबाईल की लत
मोबाईल की लत
शांतिलाल सोनी
सुबह होने को है साहब - सोने का टाइम हो रहा है
सुबह होने को है साहब - सोने का टाइम हो रहा है
Atul "Krishn"
प्रेम और आदर
प्रेम और आदर
ओंकार मिश्र
रोबोटिक्स -एक समीक्षा
रोबोटिक्स -एक समीक्षा
Shyam Sundar Subramanian
बेपनाह थी मोहब्बत, गर मुकाम मिल जाते
बेपनाह थी मोहब्बत, गर मुकाम मिल जाते
Aditya Prakash
समझे वही हक़ीक़त
समझे वही हक़ीक़त
Dr fauzia Naseem shad
मैं अकेली हूँ...
मैं अकेली हूँ...
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
"सुहागन की अर्थी"
Ekta chitrangini
चुनाव
चुनाव
Mukesh Kumar Sonkar
प्राण- प्रतिष्ठा
प्राण- प्रतिष्ठा
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
"ङ से मत लेना पङ्गा"
Dr. Kishan tandon kranti
सुप्रभातं
सुप्रभातं
Dr Archana Gupta
"पकौड़ियों की फ़रमाइश" ---(हास्य रचना)
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
जिनके पास अखबार नहीं होते
जिनके पास अखबार नहीं होते
Surinder blackpen
नव वर्ष
नव वर्ष
RAKESH RAKESH
शायरी
शायरी
goutam shaw
सितम ढाने का, हिसाब किया था हमने,
सितम ढाने का, हिसाब किया था हमने,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
कामनाओं का चक्रव्यूह, प्रतिफल चलता रहता है
कामनाओं का चक्रव्यूह, प्रतिफल चलता रहता है
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
हे कलम
हे कलम
Kavita Chouhan
■ साहित्यपीडिया से सवाल
■ साहित्यपीडिया से सवाल
*Author प्रणय प्रभात*
तभी तो असाधारण ये कहानी होगी...!!!!!
तभी तो असाधारण ये कहानी होगी...!!!!!
Jyoti Khari
✴️✳️हर्ज़ नहीं है मुख़्तसर मुलाकात पर✳️✴️
✴️✳️हर्ज़ नहीं है मुख़्तसर मुलाकात पर✳️✴️
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
*दाता माता ज्ञान की, तुमको कोटि प्रणाम ( कुंडलिया )*
*दाता माता ज्ञान की, तुमको कोटि प्रणाम ( कुंडलिया )*
Ravi Prakash
इक चितेरा चांद पर से चित्र कितने भर रहा।
इक चितेरा चांद पर से चित्र कितने भर रहा।
umesh mehra
- रिश्तों को में तोड़ चला -
- रिश्तों को में तोड़ चला -
bharat gehlot
इश्क़ ❤️
इश्क़ ❤️
Skanda Joshi
मुस्कुराना सीख लिया !|
मुस्कुराना सीख लिया !|
पूर्वार्थ
रोज मरते हैं
रोज मरते हैं
Dr. Reetesh Kumar Khare डॉ रीतेश कुमार खरे
Loading...