Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Dec 2017 · 1 min read

दिसम्बर

छंद मुक्त रचना: दिसंबर

साल का अंतिम महीना हूँ
महीनों का मैं नगीना हूँ
गर्मी को मैं देता मात
जाड़े की लाता सौगात
काम धाम सारे छोड़कर
रजाई में अब बैठो ओढ़कर
आग जलाओ चारों ओर
बिना कुछ भी अब सोच कर
मूंगफली का महीना हूँ
हां मै दिसम्बर महीना हूँ
रजाई छोड़ने का मन ना हो
सुबह कँही जाने का दिल ना हो
ओस की बरसात हो
कड़कड़ाते अब दांत हो
हाड कपाती सर्दी हो
कपड़ो से लदा इंसान हो
साल का अंतिम महीना हूँ
महीनों का मैं नगीना हूँ
हां मैं दिसम्बर महीना हूँ।।

®आकिब जावेद

Language: Hindi
450 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Akib Javed
View all
You may also like:
फिर एक समस्या
फिर एक समस्या
A🇨🇭maanush
धमकी तुमने दे डाली
धमकी तुमने दे डाली
Shravan singh
आप और हम जीवन के सच ..........एक प्रयास
आप और हम जीवन के सच ..........एक प्रयास
Neeraj Agarwal
राम विवाह कि मेहंदी
राम विवाह कि मेहंदी
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
माथे की बिंदिया
माथे की बिंदिया
Pankaj Bindas
जीवन
जीवन
Bodhisatva kastooriya
प्रेम
प्रेम
Sanjay ' शून्य'
रमेशराज के साम्प्रदायिक सद्भाव के गीत
रमेशराज के साम्प्रदायिक सद्भाव के गीत
कवि रमेशराज
मंत्र  :  दधाना करपधाभ्याम,
मंत्र : दधाना करपधाभ्याम,
Harminder Kaur
2596.पूर्णिका
2596.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
गौभक्त और संकट से गुजरते गाय–बैल / MUSAFIR BAITHA
गौभक्त और संकट से गुजरते गाय–बैल / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
LK99 सुपरकंडक्टर की क्षमता का आकलन एवं इसके शून्य प्रतिरोध गुण के लाभकारी अनुप्रयोगों की विवेचना
LK99 सुपरकंडक्टर की क्षमता का आकलन एवं इसके शून्य प्रतिरोध गुण के लाभकारी अनुप्रयोगों की विवेचना
Shyam Sundar Subramanian
बेटीयां
बेटीयां
Aman Kumar Holy
“गणतंत्र दिवस”
“गणतंत्र दिवस”
पंकज कुमार कर्ण
लाख़ ज़ख्म हो दिल में,
लाख़ ज़ख्म हो दिल में,
पूर्वार्थ
प्रेम पर्व आया सखी
प्रेम पर्व आया सखी
लक्ष्मी सिंह
हृदय में वेदना इतनी कि अब हम सह नहीं सकते
हृदय में वेदना इतनी कि अब हम सह नहीं सकते
हरवंश हृदय
Happy Father Day, Miss you Papa
Happy Father Day, Miss you Papa
संजय कुमार संजू
बदली - बदली हवा और ये जहाँ बदला
बदली - बदली हवा और ये जहाँ बदला
सिद्धार्थ गोरखपुरी
*जीवन है मुस्कान (कुंडलिया)*
*जीवन है मुस्कान (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
सर्द रातें
सर्द रातें
Sandhya Chaturvedi(काव्यसंध्या)
"चुनाव"
Dr. Kishan tandon kranti
1. चाय
1. चाय
Rajeev Dutta
पापा की तो बस यही परिभाषा हैं
पापा की तो बस यही परिभाषा हैं
Dr Manju Saini
ज़िन्दगी नाम है चलते रहने का।
ज़िन्दगी नाम है चलते रहने का।
Taj Mohammad
मातृत्व
मातृत्व
Dr. Pradeep Kumar Sharma
जनैत छी हमर लिखबा सँ
जनैत छी हमर लिखबा सँ
DrLakshman Jha Parimal
सामाजिकता
सामाजिकता
Punam Pande
देख बहना ई कैसा हमार आदमी।
देख बहना ई कैसा हमार आदमी।
सत्य कुमार प्रेमी
#शुभ_दिवस
#शुभ_दिवस
*प्रणय प्रभात*
Loading...